धार भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने ASI की 2100 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट पर सभी पक्षों से 2 सप्ताह में आपत्तियां मांगी हैं। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

इंदौर/धार। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित धार भोजशाला मामले में सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पेश की गई 2100 पन्नों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
कोर्ट की कार्यवाही के मुख्य बिंदु:
दावे और आपत्तियां: हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को ASI की 98 दिनों की जांच रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराने और उस पर दो सप्ताह के भीतर अपनी लिखित आपत्तियां या सुझाव पेश करने को कहा है।
अगली तारीख: मामले की विस्तृत सुनवाई अब 16 मार्च 2026 को तय की गई है।
याचिकाकर्ता का दावा: हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने रिपोर्ट को उत्साहजनक बताते हुए दावा किया कि सर्वे के दौरान मिली मूर्तियां और श्लोक युक्त शिलालेख यह सिद्ध करते हैं कि यह स्थान सरस्वती सदन 'भोजशाला' ही है।
बता दें कि ASI ने 98 दिनों तक भोजशाला परिसर में आधुनिक तकनीकों से वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट अब कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।
क्या है पूरा मामला
धार की ऐतिहासिक भोजशाला का विवाद मुख्य रूप से एक प्राचीन परिसर के मालिकाना हक और धार्मिक स्वरूप को लेकर है, जिसे हिंदू पक्ष 'वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर' मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे 'कमाल मौला मस्जिद' बताता है। राजा भोज द्वारा 1034 ईस्वी में निर्मित इस स्थान पर वर्तमान में एएसआई (ASI) की 1903 की व्यवस्था लागू है, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते हैं। विवाद तब और गहरा गया जब हिंदू पक्ष ने इसे पूरी तरह मंदिर घोषित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद हाल ही में 2100 पन्नों की एएसआई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पेश की गई है। इस रिपोर्ट में मिले प्राचीन शिलालेख और मूर्तियों के आधार पर अब न्यायालय यह तय करेगा कि इस ऐतिहासिक धरोहर का भविष्य और मूल पहचान क्या होगी।

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