भाजयुमो की नई प्रदेश टीम में सतना और विंध्य के कई जिले खाली, दावेदारों को जगह नहीं मिलने से युवाओं में नाराजगी, संगठन में क्षेत्रीय उपेक्षा और नेतृत्व पर सवाल तेज हुए

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने अपनी 56 सदस्यीय टीम की घोषणा की है, इसमें 7 उपाध्यक्ष, 2 महामंत्री और 8 मंत्री शामिल हैं। भाजयुमो की सामने आई इस जम्बो टीम के बीच सियासी गलियारों में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर सतना के दावेदारों के हाथ खाली क्यों हैं? जी... हां भाजयुमो की टीम सामने आने के बाद युवा नेताओं में मायूसी छा गई है। भले ही अनुशासन के डंडा के चलते सार्वजनिक तौर पर कोई कुछ न बोल रहा हो लेकिन दबी जुबान से सभी लिस्ट सामने आने के बाद अपने-अपने आक्रोश को व्यक्त कर रहे हैं। बताया जाता है कि जिले से 5 ऐसे नाम थे, जिन्हें माना जा रहा था कि भाजयुमों की प्रदेश टीम में इनको कोई न कोई पद जरूर मिल सकता है, पर ऐसा नहीं हुआ।
शायद पांच सौ किमी दूर नहीं पड़ी नजर
भाजयुमो की प्रदेश टीम में जगह पाने के दावेदारों की बात की जाए तो लगभग आधा दर्जन के करीब ऐसे चेहरे थे जिन्हें माना जा रहा था कि इनमें से कोई प्रदेश टीम में स्थान बनाएंगा,ये नाम ऐसे नहीं थे कि जिनके नाम की सिर्फ चर्चा थी ये ऐसे नाम हैं जिन्होंने युवा मोर्चा में रहते हुए संगठन को बूथ तक मजबूत करने के लिए खून -पसीना एक किया है, पर शायद यहां से लगभग पांच सौ किमी दूर बैठे प्रदेश नेतृत्व को इन युवाओं का संगठन के प्रति निष्ठा और समर्पण नजर नहीं आ रहा है।
कहीं शक्ति प्रदर्शन तो भारी नहीं पड़ गया
लगभग साढ़े तीन माह के बाद सामने आई भाजयुमो की प्रदेश की टीम से सतना के कई युवा दिग्गज नेताओं के नाम गायब हैं। दिग्गजों के नाम गायब होने से कई सवाल खड़े हुए हैं। एक सवाल राजनीतिक हलकों में बड़ी तेजी के साथ उठ रहा है कि कहीं भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के सतना दौरे के दौरान युवा नेताओं द्वारा किया गया शक्ति प्रदर्शन तो कहीं उनकी गले की हड्डी तो नहीं बन गया।
इनको माना जा रहा था दावेदार
भाजयुमो की प्रदेश टीम के लिए जिन युवा नेताओं को दावेदार माना जा रहा था, उनमें पार्टी के युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष सौभाग्य केसरी, मोर्चे के प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुनील मिश्रा, विशेष आमंत्रित सदस्य आदित्य यादव, युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष पुष्पराज कुशवाहा तथा पूर्व जिला मंत्री शुभम तिवारी, शुभम युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। माना जा रहा है कि इन पांच में से किसी न किसी को युवा मोर्चा में अहम पद दिया जा सकता है लेकिन सतना के हाथ खाली ही रहे। ऐसा नहीं है कि प्रदेश की टीम में आने के लिए दावेदारों ने हाथ-पांव नहीं मारे हैं, जो संभव प्रयास हो सके हैं वे सभी प्रयास दावेदारों द्वारा किए गए हैं लेकिन सफलता नहीं मिली।
संतुष्ट करने के लिए भी नहीं दिया पद
भाजपा युवा मोर्चा की 56 सदस्यीय जम्बों टीम में कई पद ऐसे हैं, जिन्हें कार्यकर्ताओं को उपकृत करने के लिए सृजित किया गया है। बावजूद इसके इन पदों पर विंध्य के नौ जिलों सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर एवं उमरिया को सिर्फ एक पद दिया गया है। वह भी ‘मन की बात’ का प्रभारी मुख्य बाडी के एक भी पद पर पार्टी का कोई पदाधिकारी इन जिलों से नहीं बनाया गया।
प्रदेश से तारीफ तो मिलती है पद नहीं
विंध्य का राजनीतिक नेतृत्व सत्ता और संगठन की दृष्टि से हमेशा ही कमजोर रहा है। सत्ता और संगठन में विंध्य को जैसी भागेदारी कांग्रेस के शासन काल में मिली है, वैसी भाजपा के दौर में कभी भी नहीं। भाजपा शासन काल में सत्ता हो या फिर संगठन हमेशा मालवा व अन्य क्षेत्र का दबदबा रहा। विंध्य में नेतृत्व के लिहाज से पार्टी नेताओं में योग्यता की कोई कमी नहीं है, लेकिन युवा मोर्चा हो या फिर भाजपा की मेन बॉडी कहीं भी उचित महत्व नहीं मिल रहा है। हाल ही में घोषित युवा मोर्चा की भारी भरकम टीम में कई जिला अध्यक्षों को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है, पर सतना के मामले में ऐसा नहीं हुआ है। यह बात अलग है कि अक्सर हर कार्यक्रम और अभियान में सतना को सफलता मिलती है इसको लेकर सतना की तारीफ प्रदेश स्तर पर होती है, पर जब पद देने की बारी आती है तो सतना के हिस्से में मायूसी ही आती है।
विंध्य ने दिया साथ पर प्रतिनिधित्व देने में कंजूसी
भाजयुमो की प्रदेश टीम में विंध्य के जो जिले पूरी तरह से खाली रह गए हैं उनमें मैहर, रीवा,मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर एवं उमरिया शामिल हैं। यहां से किसी भी युवा नेता को प्रदेश की टीम में जगह नहीं दी गई है। विंध्य के दो संभाग और नौ जिलों में तीस विधानसभा सीटों और चार लोकसभा सीटें आती हैं और इनमें लगातार भाजपा को विजय मिल रही है। पिछले चार - पांच चुनावों में विंध्य पूरी तरह से भाजपा के साथ है पर जब सत्ता और संगठन में यहां से प्रतिनिधित्व देने की बात आती है तो हमेशा विंध्य के साथ छल ही होता है और उसे निराशा ही हाथ लगती है।


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