जिला अस्पताल परिसर में दो आवारा सांडों की घंटों चली लड़ाई ने मरीजों, परिजनों और स्टाफ में अफरा-तफरी मचा दी। नवजात को गोद में लिए महिलाएं मुश्किल से बचीं, कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जबकि सुरक्षा गार्ड नदारद रहे। पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में इस समय हर जगह आवारा पशुओं की धमाचौकड़ी देखने को मिल रही है। इन आवारा जानवरों के के कारण आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। शुक्रवार की दोपहर ऐसा ही मामला जिला अस्पताल परिसर में देखने को मिला।
जिला अस्पताल के अंदर उस वक्त हड़कंप मच गया जब दो सांडों की घंटो तक लड़ाई चलती रही। लड़ाई इतनी जबरदस्त थी कि मानो दोनों सांडों को काबू करना किसी के बस में नहीं था। दोनों सांडों ने कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया। देखते ही देखते जिला अस्पताल परिसर में लोगों का हुजूम लग गया। वहां पर मौजूद लोगों के प्रयास करने के घंटों बाद लड़ाई शांत हुई। गनीमत यह रही कि किसी मरीज या परिजन को चोट नहीं आई और कोई बड़ी घटना होते-होते टल गई।
नवजात को गोद में लिए महिलाएं बाल-बाल बचीं
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को दोपहर एक बजे दो आवारा जानवर लड़ते हुए ट्रामा यूनिट के रास्ते जिला अस्पताल परिसर के अंदर पहुंचे। आवारा जानवरों के बीच लड़ाई उस वक्त हुई जब अस्पताल परिसर में मरीजों और परिजनों की भारी भीड़ थी। आवारा जानवरों कि लड़ाई से पूरे जिला अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल मच गया। मरीज एवं परिजन अपनी जान बचाने सुरक्षित स्थान ढूंढने लगा, लेकिन इन आवारा सांडों ने किसी स्थान को नहीं छोड़ा। बताया गया कि पोषण पुनर्वास केंद्र से लेकर जिला अस्पताल के मुख्य द्वार के बीच लड़ाई इतनी प्रचंड थी कि मौके पर दो महिलाएं नवजात को लिए भागते दिखी। अगर ये महिलाएं किसी सुरक्षित स्थान न पहुंचती तो निश्चित ही कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो जाती। इसके बाद आवारा जानवरों द्वारा पार्किंग में खड़ी वाहनों और एम्बुलेंस को निशान बनाया गया। परिसर में उपस्थित जनता की सूझ-बूझ से जानवरों को जिला अस्पताल के बाहर खदेड़ा गया, लेकिन प्रबंधन द्वारा मरीजों की सुरक्षा में लगाए गए डंडाछाप गार्ड झांकने भी नहीं आए। जिला अस्पताल परिसर में हुई इतने बड़े घटनाक्रम ने एक बार फिर मरीजों और परिजनों की सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है? लड़ाई करते अगर ये आवारा जानवर किसी वार्ड के अंदर पहुंच जाते और कोई बड़ा घटनाक्रम घट जाता तो उसका गुनहगार कौन होता?
नहीं सुधरेगी पार्किंग व्यवस्था
जिला कलेक्टर एवं जिला अस्पताल प्रबंधन के कई आदेशों के बाद भी अस्पताल परिसर की पार्किंग व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। प्रबंधन द्वारा कई मर्तबा जिला अस्पताल के पार्किंग ठेकेदार को पार्किंग व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए चेतावनी तक जारी की गई है। इसके बावजूद व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। ट्रामा यूनिट से जिला अस्पताल के मुख्य द्वार तक अवैध पार्किंग में वाहनों के खड़े होने के कारण आए दिन जाम की स्थिति देखने को मिलती है। अव्यवस्थित पार्किंग के चलते अस्पताल परिसर में आने और बाहर मरीज को ले जाने वाली एम्बुलेंस को घंटों का समय तक लग जाता है, इसके बावजूद भी कोई भी अधिकारी इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रहा है।


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