सीधी जिले के आदिवासी ब्लॉक कुसमी के टमसार गांव के बैगान टोला में उल्टी-दस्त (हैजा) का प्रकोप फैल गया है। बीते 3 दिनों में 22 लोग संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 20 मरीजों का उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टमसार में और 2 गंभीर मरीजों का जिला चिकित्सालय सीधी में चल रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जताई है और कलेक्टर से तत्काल पहल की मांग की है।

हाइलाइट्स
सीधी, स्टार समाचार वेब
इन दोनों महीने भर से पूरा जिला जोरदार बारिश की चपेट में है, और जैसा की हमेशा से होता आया है कि जब बारिश अपने भयंकर रूप में रहती है तो जलजनित बीमारियों का भी प्रकोप पूरी तरह से आमजन में देखा जाता है। शहरी क्षेत्र के लोगों में तो जागरूकता के कारण और उन्हें स्वच्छ पेयजल मिल जाने के कारण वो इन जलजनित बीमारियों से अक्सर सुरक्षित रहते हैं परंतु ग्रामीण इलाकों के हाल कुछ और होते हैं। सीधी जिला एक आदिवासी बाहुल्य पिछड़ा जिला है जिसके कारण यहां ग्रामीण क्षेत्रों में कई इलाकों में स्वच्छ पेयजल का सदैव से संकट रहा है, कई जगह तो हालत ये हैं कि लोग काफी दूर से पेयजल लाते हैं। कई जगह लोग नदी नाले का पानी पीते हैं, और कई जगह लोग पानी की समस्या से जूझते हुए बरसात के पानी को ही एकत्र कर पी लेते हैं। इन सभी वजहों से हर वर्ष बरसात के इस मौसम में सीधी जिले में उल्टी, दस्त, हैजा जैसी संक्रामक जलजनित बीमारियों के फैलने और उससे लोगों की मौतों के मामले आते रहे हैं।
क्या है ताजा मामला
इस वर्ष लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच सीधी जिले के आदिवासी ब्लॉक कुसमी के टमसार गांव के बैगान टोले में उल्टी दस्त (हैजा) बीमारी के प्रकोप में बीते 3 दिनों के भीतर तकरीबन 2 दर्जन के करीब लोग आ गए हैं, जिनका उपचार टमसार के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला चिकित्सालय सीधी में चल रहा है। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 4 सितंबर को जहां 1 व्यक्ति इसकी चपेट में आया, वहीं दूसरे दिन 5 सितंबर को 4 लोग, तीसरे दिन 6 सितंबर को 5 लोग इसकी चपेट में आये। जबकि 7 सितंबर को एक साथ 8 लोग इसकी चपेट में आ गए और 8 सितंबर को 4 मरीज फिर सामने आए यानी 3 दिनों में जहां 10 लोग संक्रमित हुए, वहीं 2 दिनों में 12 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। इस मामले में अभी तक कुल 22 लोग संक्रमित हुए जिसमें से 20 लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टमसार में भर्ती कर प्राथमिक उपचार कराया गया है जो अब स्वस्थ हैं, वहीं 2 लोग जो ज्यादा गंभीर थे उनको सोमवार को सीधी जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ टमसार सरपंच मकरंद सिंह उइके एवं ग्रामीण रामबहादुर प्रजापति द्वारा मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद की गयी एवं जो दवाइयां सरकारी अस्पताल में नहीं थीं सरपंच द्वारा प्रायवेट क्लीनिक से खरीदकर उनका इलाज कराया गया। साथ ही सरपंच श्री उइके के द्वारा 20 मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र टमसार एवं 8 सितंबर को 2 मरीजों को जिला चिकित्सालय तक लाया गया। इलाके के सरपंच द्वारा एहतियातन गांव के कुओं में ब्लीचिंग पाउडर भी डलवाया गया है।
शिकायतों के बाद भी नहीं जागा स्वास्थ्य विभाग
इस मामले में जहां स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अब तक सक्रिय होकर पूरे इलाके में अपनी टीम भेजकर लोगों में जागरूकता के साथ-साथ उन्हें एहतियातन दवाइयों का वितरण करना चाहिए। इस मामले में जिले के स्वास्थ्य अधिकारी पूरी तरह लापरवाह नजर आ रहे हैं। बीते कई दिनों से इसकी शिकायत आने के बाद अब तक जिले के सीएमएचओ को इस मामले में सार्थक पहल करनी चाहिए पर कोई भी पहल स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस मामले में अभी तक नहीं की गई है। सिर्फ स्थानीय स्तर के सरपंच और समाजसेवी लोगों द्वारा अपने तरफ से लोगों की मदद की गई है। जिला कलेक्टर का ध्यान इस गंभीर मामले की तरफ आकृष्ट कराते हुए तत्काल इस पर सार्थक पहल की उम्मीद ग्रामीणों ने की है।
ये आये चपेट में
जलजनित बीमारी के संक्रमण से हैजा की चपेट में जो लोग आये हैं उन मरीजों में राजेश कुमार बैगा 27 वर्ष, मीना बैगा उम्र 17 वर्ष, सतकली बैगा उम्र 24 वर्ष, अंशू सिंह पठारी ढाई वर्ष, मुन्नीबाई बैगा 42 वर्ष, फूलबाई बैगा 20 वर्ष, राजकुमारी बैगा 21 वर्ष, निर्मला बैगा 8 वर्ष,विश्वनाथ बैगा 28 वर्ष, सितारा बैगा 12 वर्ष, धर्मराज बैगा 27 वर्ष, आशादेवी बैगा 22 वर्ष, फूलबाई बैगा 25 वर्ष, इंद्रनिया बैगा 35 वर्ष, मोनिका पठारी 12 वर्ष,श्यामकली बैगा 28 वर्ष, सीताराम बैगा 27 वर्ष, अशोक कुमार बैगा 10 वर्ष, फुलमतिया बैगा 12 वर्ष,रोशनी बैगा 8 वर्ष, उषादेवी बैगा 22 वर्ष, आरती सिंह(पठारी )उम्र 22 वर्ष, दादूलाल बैगा 30 वर्ष,रामबती बैगा 26 वर्ष, श्यामबाई बैगा 27 वर्ष, राजकली बैगा 32 वर्ष शामिल हैं।


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