जिला अस्पताल के बाहर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई महज दो दिन में बेअसर दिखी। ठेले, गुमटियां और अवैध पार्किंग फिर लौट आईं, जबकि एम्बुलेंसों के लिए बनाई गई नई व्यवस्था भी धरातल पर नहीं उतरी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
चार दिन की चांदनी... फिर अंधेरी रात, यह कहावत जिला अस्पताल के अतिक्रमण अभियान पर बिल्कुल सटीक बैठ रहा है। दो दिन पूर्व जिला अस्पताल को अतिक्रमण मुक्त बनाने बड़ी कार्रवाईयां की गई। अस्पताल के गेट के बहार सजी दुकानों को हटाया गया, मोटर साइकिलें जब्त की गई, बड़े-बड़े मंथनो में निर्णय के बाद जरा सी जगह ढूंढकर सरकारी एम्बुलेंस खड़ी भी कराई गई, वहां फोटो सेशन भी हुआ, लेकिन यह नई व्यवस्था दो दिन भी नहीं टिक पाई। शनिवार को फिर वही नजर दिखा जिसने सारी नई व्यवस्थाओं पर पानी फेर दिया। शनिवार को अस्पताल के बाहर ठेले व गुमटियां फिर खुली दिखाई दी,सड़क पर दोनों ओर अवैध स्थानों में मोटर साइकिलें भी खड़ी थी, अस्पताल परिसर के अंदर एम्बुलेंस खड़ी थी जबकि खोवा मंडी में खाली कराई जगह खाली पड़ी थी। सब कुछ फिर पहले जैसा ही दिखा हालांकि शनिवार को जाम नहीं लगा इसलिए जिले के जिम्मेदारों को पता नहीं चला। इतनी कार्रवाइयों के बाद भी अतिक्रमणकरियों को प्रशासन का भय नहीं है।
जनता भी जबाव चाहती है कि आखिरकार जिला अस्पताल अतिक्रमण गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा लम्बे अरसे बाद कोई बड़ा निर्णय लिया गया था जो यातायात एवं अतिक्रमण सुधार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता था। जिला अस्पताल रोड पर फैले अतिक्रमण के निदान के लिए जिला प्रशासन द्वारा रोड से अवैध अतिक्रमण हटाया गया था, वहीं गुरुवार को हुई बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए थे जिसमे सरकारी एम्बुलेंस को खोवा मंडी में खाली पड़ी जगह में खड़ी करने के निर्देश दिए गए थे।
नहीं मिले नए निर्देश
शुक्रवार और शनिवार को स्टार समाचार टीम ने पड़ताल में पाया कि जिला अस्पताल परिसर के अंदर 108 एम्बुलेंस खड़ी थी। यहां तक कि अन्य जगह से रेफर होकर आई जननी एक्सप्रेस और 108 भी अन्य मरीज के इंतजार में खड़ी थी। कोई भी वहां चालक खोवा मंडी वाली जगह में जाने को तैयार नहीं दिखा। स्टार समाचार की टीम ने जब एम्बुलेंस वाहन चालक से नए निदेर्शों के बारे में पूंछा तो उसका जवाब था कि हमें अभी कोई नए आदेश नहीं मिले है।
दलाली बंद होने का डर
वैसे देखा जाए तो एम्बुलेंस वाहन चालकों के बाहर न जाने का एक एक दूसरा पहलू भी सामने आया है जिसमें उनकी दलाली का खेल शामिल है। कई एम्बुलेंस वाहन चालक अस्पताल परिसर में ही अपनी आईडी बंद कर या जगह बदलकर मरीजों के परिजनों से पैसों की लालच में खड़े रहते हैं। मौके पर ही मरीज के परिजनों से सौदा भी किया जाता है। यहां तक कि कई चालक लोकेशन तक बदल देते हैं। इधर नए निर्देश में उन्हें यह डर भी है कि अगर हम बाहर खड़े रहेंगे तो दूसरा चालक मरीजों को ले जायेगा। इन्हीं सभी वजहों से एम्बुलेंस वाहन चालकों का अस्पताल परिसर से मोह नहीं छूट पा रहा है।
अस्पताल को अतिक्रमण मुक्त बनाना पहली प्राथमिकता है। यहां दलाली किसी भी प्रकार से स्वीकार नहीं की जाएगी। परिसर के अंदर खड़ी एम्बुलेंस की फोटो खींचकर यातायात विभाग और आरटीओ को भेजी जाएगी ताकि चालानी कार्रवाई की जा सके।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन,जिला अस्पताल

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