सतना जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगा काऊ कैचर अव्यवस्थित होकर एम्बुलेंस और वाहनों के लिए खतरा बन गया है, कई हादसे होते-होते बचे, प्रबंधन और ठेकेदार की लापरवाही उजागर हुई।
सतना जिला अस्पताल की पहली मंजिल पर एक साल पहले लगी टाइल्स उखड़ने लगी हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सतना जिला अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल भेजने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कायाकल्प फाइनल मूल्यांकन के तहत तीन सदस्यीय टीम ने जिला अस्पताल सतना के सभी विभागों का गहन निरीक्षण कर सेवाओं, स्वच्छता और प्रबंधन की सराहना की।
सतना जिला अस्पताल में 62 जरूरी दवाओं की कमी, मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने की मजबूरी, व्यवस्था पर सवाल।
सतना जिला अस्पताल के थैलीसीमिया कांड को दो महीने बीत जाने के बाद भी संक्रमित रक्त के संदिग्ध डोनरों की पहचान नहीं हो सकी है। इंदौर से आई सीडीएससीओ की टीम ने एक बार फिर ब्लड बैंक का निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच की, लेकिन आधिकारिक चुप्पी बनी रही।
सतना जिला अस्पताल परिसर में 150 बिस्तरीय अस्पताल निर्माण के चलते पार्किंग हटाई गई, वैकल्पिक व्यवस्था न होने से सड़क पर अवैध पार्किंग और अव्यवस्था की आशंका।
सतना जिला अस्पताल में एचआईवी पॉजिटिव एक्सीडेंट पीड़ित की सफल हड्डी सर्जरी कर मानवता की मिसाल पेश की गई।
सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में गंभीर कमी, केवल 8 यूनिट शेष, मरीजों के लिए निजी अस्पताल से ब्लड मंगवाना पड़ा।
सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड ग्रुप पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। ओ पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव के सीमित यूनिट बचे हैं। एचआईवी कांड के बाद रक्तदान में आई कमी से थैलीसीमिया, सिकिल सेल, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान पर संकट गहरा गया है।






















