खाड़ी देश के छात्र का रिजल्ट रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने CBSE और दुबई क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को होगी।

एजुकेशन डेस्क। स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खाड़ी देश (सऊदी अरब) में रहने वाले कक्षा 12 के एक छात्र की याचिका पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और उसके दुबई स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया है। छात्र ने बोर्ड से अपना परिणाम जल्द से जल्द घोषित करने की मांग की है। पश्चिम एशियाई देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाए जाने के बावजूद, इस छात्र का रिजल्ट अब तक रोका गया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए CBSE को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई के लिए 12 जून 2026 की तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल का मूल्यांकन संबंधित स्कूल द्वारा किया जाना जरूरी था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने एक 'निाइवेट कैंडिडेट' (निजी परीक्षार्थी) के रूप में परीक्षा दी थी, जिसके कारण स्कूल के पास ऐसा कोई पुराना मूल्यांकन रिकॉर्ड या इंटरनल असेसमेंट उपलब्ध नहीं है।
CBSE की इस दलील पर न्यायमूर्ति मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से एक व्यावहारिक सुझाव दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड (जैसे कक्षा 10वीं या 11वीं के परिणाम) पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने CBSE के वकील से शुक्रवार तक इस संबंध में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने को कहा है। हालांकि बोर्ड के वकील ने सोमवार तक का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे 12 जून को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
याचिका के अनुसार, प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने सऊदी अरब के अल जुबैल से CBSE कक्षा 12 सुधार परीक्षा (Improvement Exam) में निजी परीक्षार्थी के रूप में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषयों की परीक्षा दी थी।
जब CBSE ने 13 मई को कक्षा 12 के नतीजे घोषित किए, तब याचिकाकर्ता का परिणाम जारी नहीं किया गया और उसकी स्थिति "आर. एल. (Result Later)" दिखाई गई। छात्र का कहना है कि परिणाम घोषित न होने से उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। वह बी.टेक (B.Tech) कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है और अन्य संस्थानों में भी आवेदन करने के अवसरों से वंचित हो गया है।
याचिका में बताया गया है कि परीक्षा अवधि के दौरान खाड़ी क्षेत्र में युद्ध संबंधी तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण CBSE ने गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान सहित कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। पश्चिम एशियाई देशों में छात्रों को हुई इस परेशानी को देखते हुए CBSE ने 27 मार्च को एक विशेष मूल्यांकन योजना जारी की थी। इस योजना में त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर रिजल्ट तैयार करने का प्रावधान था, लेकिन निजी परीक्षार्थी होने के कारण प्रांशु को इसका लाभ नहीं मिल सका।
अधिवक्ता विनीत जिंदल के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों की यह कार्रवाई मनमानी, अनुचित और भेदभावपूर्ण है। यह छात्र के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि CBSE को मूल्यांकन योजना लागू करते हुए परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए, या फिर रद्द किए गए विषयों के लिए तुरंत विशेष परीक्षा आयोजित की जाए।

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