देश के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) को लेकर सालों से चली आ रही झिझक अब जल्द ही खत्म होने वाली है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि देशभर के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी कर ली गई है।

सालों से चली आ रही झिझक अब खत्म
प्राइमरी लेवल से हफ्ते में दो दिन चलेगी क्लास
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
एनसीईआरटी तैयार करेगा नया पाठ्यक्रम
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देश के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) को लेकर सालों से चली आ रही झिझक अब जल्द ही खत्म होने वाली है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि देशभर के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी कर ली गई है। कोर्ट की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा किशोरों के आपसी सहमति वाले संबंधों में पॉक्सो कानून के दुरुपयोग पर जताई गई चिंता के बाद सरकार की एक हाई-लेवल कमेटी ने नई शिक्षा नीति के तहत प्राइमरी स्तर से ही व्यापक यौन शिक्षा और बच्चों के यौन शोषण जैसे विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की सिफारिश की है।
सुप्रीम मंजूरी का इंतजार
दरअसल, देश में सेक्स एजुकेशन को लेकर एक झिझक लंबे वक्त से चली आ रही है, वह अब खत्म होने की कगार पर है। इसकी वजह है कि सरकार ने सेक्स एजुकेश को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि देशभर के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन शुरू करने की तैयारी है और कोर्ट की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की बेंच के सामने यह बात रखी।
पॉक्सो कानून के दुरुपयोग पर चिंता
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों के आपसी सहमति वाले प्रेम संबंधों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि कई मामलों में 16 से 18 वर्ष की उम्र के किशोर संबंध बनाकर घर छोड़ देते हैं और अभिभावक झूठी सम्मान के नाम पर आपराधिक कार्रवाई शुरू करा देते हैं। केंद्र ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में 26 सदस्यों वाले एक पैनल का गठन किया था, जिसे पॉक्सो एक्ट के संदर्भ में आपसी सहमति से यौन संबंध बनाने वाले किशोरों की निजता के अधिकार से जुड़े मुद्दों की जांच करनी थी।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप होंगे विषय
पैनल ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में व्यापक यौन शिक्षा और बच्चों के यौन शोषण जैसे विषय शामिल किए जाएं। पैनल ने यह भी सिफारिश की है कि एनसीईआरटी इसका पाठ्यक्रम तैयार करे। सेक्स एजुकेशन को नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप लागू करने को कहा गया है। प्राइमरी स्कूल के लेवल से ही इन विषयों के लिए एक एक्सपर्ट टीचर की नियुक्ति की जानी चाहिए। सप्ताह में दो बार 20 मिनट के लिए इन विषयों की क्लास अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
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