कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने NTA से पेपर लीक की परिभाषा और CBSE से OSM टेंडर नियमों में बदलाव को लेकर तीखे सवाल पूछे हैं। जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
संसदीय समिति ने परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पर शिकंजा कस दिया है। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों एजेंसियों से लिखित में जवाब तलब किया है। समिति ने NTA से 'पेपर लीक' की आधिकारिक परिभाषा स्पष्ट करने को कहा है, वहीं CBSE से ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के नियमों में बदलाव को लेकर तीखे सवाल पूछे हैं।
सूत्रों के अनुसार, संसदीय समिति ने NTA अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद कई कड़े सवाल दागे हैं। समिति ने पूछा है कि एजेंसी की कार्यप्रणाली के तहत किस स्थिति को 'पेपर लीक' माना जाता है? इसके साथ ही 2018 में NTA के गठन से लेकर अब तक आयोजित हुईं परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।
हालांकि, NTA अधिकारियों का दावा है कि उनकी प्रणाली से कोई पेपर लीक नहीं हुआ था; जो सामग्री प्रसारित हो रही थी, वह महज एक 'गेस पेपर' (अनुमानित प्रश्नपत्र) थी।
समिति ने NTA से NEET-UG 2024 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
स्वतंत्र जांच: समिति ने पूछा है कि क्या NTA ने CBI जांच के अलावा अपने स्तर पर इस मामले की कोई आंतरिक जांच कराई थी?
कर्मचारियों का विवरण: पिछले तीन वर्षों में NTA के स्टाफ की संख्या, 2022 के बाद हुई नई भर्तियों और उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई वार्षिक रिपोर्टों का ब्यौरा मांगा गया है।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें: जून 2024 में पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की 101 सिफारिशों पर NTA द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। NTA को 10 जून तक अपने लिखित जवाब सौंपने हैं।
संसदीय समिति ने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के ठेके में हुए कथित भ्रष्टाचार और नियमों में ढील दिए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। CBSE को 8 जून तक निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब देने का निर्देश दिया गया है:
समिति ने पूछा है कि क्या CBSE को इस बात की जानकारी थी कि OSM का ठेका पाने वाली कंपनी 'कोएम्पट एडुटेक' और उसके निदेशक पहले 'ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज' से जुड़े थे? गौरतलब है कि ग्लोबरेना वही कंपनी है जिसकी मूल्यांकन प्रणाली पर 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों में भारी गड़बड़ी के बाद सवाल उठे थे। अनुबंध देते समय इस तथ्य को क्यों नजरअंदाज किया गया?
यह सवाल भी उठाया गया है कि OSM अनुबंध के तीसरे रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) से खराब प्रदर्शन करने वाले बोलीदाताओं को अयोग्य ठहराने का प्रावधान क्यों हटाया गया? साथ ही, पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के बजाय, इस शर्त को सिर्फ 'वर्तमान में ब्लैकलिस्टेड' कंपनियों तक ही क्यों सीमित कर दिया गया? इसके अलावा, बोलीदाता के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त रखने के पीछे क्या मंशा थी?
समिति ने नियमों में किए गए कई तकनीकी बदलावों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं:
डेटा सेंटर: ठेकेदारों को अपने डेटा सेंटर रखने की प्राथमिकता हटाकर MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) से मान्यता प्राप्त डेटा सेंटर का उपयोग करने वालों को वरीयता क्यों दी गई?
स्कैनिंग तकनीक: रोबोटिक स्कैनर और उत्तर पुस्तिकाओं की रीढ़ (Spine) काटे बिना स्कैनिंग करने की अनिवार्य शर्तों को क्यों हटाया गया?
रिजॉल्यूशन में कटौती: स्कैनिंग की गुणवत्ता (Resolution) को न्यूनतम 300 DPI से घटाकर 200 DPI क्यों किया गया?
अनुभव के मानदंड: किसी एक प्रोजेक्ट में कम से कम 5 लाख छात्रों का अनुभव होने की शर्त को बदलकर, कई छोटे प्रोजेक्ट्स की कुल कॉपियों को मान्य करने का प्रावधान क्यों किया गया?
सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति ने CBSE से फरवरी, मई और अगस्त 2025 में जारी किए गए OSM RFP से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, जो बोर्ड ने अब तक उपलब्ध नहीं कराए हैं। इसके अलावा, OSM के 'ड्राई रन' (मॉक टेस्ट) के दौरान पर्यवेक्षकों (Observers) की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई और क्या इसे शिक्षा मंत्रालय के साथ साझा किया गया था, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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