वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ और ईपीएस के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानिए इसके नियम, कंपनियों और सरकार पर पड़ने वाले असर की पूरी जानकारी।

बिजनेस डेस्क । स्टार समाचार वेब
संगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। यदि केंद्रीय कैबिनेट इस प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा देती है, तो ऐसे सभी कर्मचारी जिनका मासिक मूल वेतन (Basic Salary) 25,000 रुपये है, उन्हें अनिवार्य रूप से कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) का लाभ मिलने लगेगा। वर्तमान समय में यह सीमा काफी कम थी, जिसके दायरे में कई कर्मचारी नहीं आ पाते थे।
वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज की मौजूदा वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये करने से जुड़े प्रस्ताव को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद, अब इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Central Cabinet) के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह नया नियम देश भर में लागू हो जाएगा।
यह नया प्रस्तावित नियम उन सभी पंजीकृत कंपनियों और संस्थानों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा, जहां कम से कम 20 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। इस संशोधन के बाद, उन तमाम कर्मचारियों को भी भविष्य निधि और पेंशन के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा, जो अब तक इस अनिवार्य लाभ से वंचित थे। गौरतलब है कि इस वेतन सीमा में आखिरी बार संशोधन लगभग एक दशक पहले सितंबर, 2014 में किया गया था, जिसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने शुरुआत में इस वेतन सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ हुई उच्च-स्तरीय और गहन समीक्षा बैठकों के बाद, वित्तीय स्थिति और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस सीमा को संशोधित करके 25,000 रुपये प्रति माह (मूल वेतन और महंगाई भत्ते यानी DA को मिलाकर) तय करने पर अंतिम सहमति बनी।
वर्तमान नियम:
मौजूदा नियमों के मुताबिक, केवल 15,000 रुपये तक का मूल वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए ही EPFO में अनिवार्य रूप से योगदान देना आवश्यक होता था। जिन कर्मचारियों का वेतन इस सीमा से अधिक था, उनके पास अपनी इच्छा अनुसार ईपीएफ योजना से बाहर रहने या स्वैच्छिक योगदान देने का विकल्प मौजूद था।
संभावित बदलाव:
नए नियमों के लागू होने के बाद अनिवार्य कवरेज की यह सीमा बढ़कर 25,000 रुपये हो जाएगी, जिससे उच्च वेतन वर्ग के एक बड़े हिस्से को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच मिल सकेगा।
वेतन सीमा बढ़ाए जाने के इस कदम से जहां एक ओर कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नियोक्ताओं (कंपनियों) और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ भी बढ़ जाएगा:
कंपनियों पर असर:
कंपनियों को अब और अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन खाते में 12 फीसदी का अनिवार्य योगदान देना होगा। इससे कंपनियों की कुल पेरोल लागत (Payroll Cost) में इजाफा होगा।
सरकार पर असर:
नियम के अनुसार, सरकार भी पेंशन फंड में कर्मचारी के मूल वेतन का 1.16 फीसदी हिस्सा योगदान के रूप में देती है। वेतन सीमा के बढ़ने से सरकार का पेंशन सब्सिडी बजट भी स्वतः ही बढ़ जाएगा।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ा। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 278.32 अंक गिरकर 77,450.64 पर आ गया।
सोना और चांदी का रेट हर दिन बदल रहा है। आज नागपंचमी के दिन सोने की कीमतों में तेजी आई है। सोमवार को 24 कैरेट सोना 609 चढ़कर 1,55,115 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। कल 1,54,506 रुपए प्रति 10 ग्राम था। चांदी का रेट भी 1476 चढ़कर 2,37,400 रुपए प्रति किलो हो गया है।
आज शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव बाजार पर हावी रहे। निवेशकों की सतर्कता के बीच बाजार में कमजोरी देखी गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 284.85 अंक गिरकर 77,717.05 पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली के कारण देश की शीर्ष 10 में से 5 कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया है। जानिए टीसीएस, रिलायंस, एलआईसी और एसबीआई समेत किन कंपनियों को हुआ नफा और नुकसान।
रियल एस्टेट सलाहकार सीबीआरई की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित सात भारतीय राज्य 2031 तक 1380 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। इन केंद्रों से करीब 12 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा होने का लक्ष्य है।
भारत में आज शुरुआती कारोबार के चंद मिनटों बाद शेयर बाजार की चाल और बिगड़ गई। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान पर खुले।
जुलाई 2026 के ताजा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45% हो गई है। खाद्य पदार्थों, प्याज, लहसुन और अदरक की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों के बाद शेयर बाजार की चाल डगमगा गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के दबाव में सेंसेक्स लुढ़क गया। वहीं, निफ्टी में भी गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रूख देखने को मिल।
टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से पहले पद छोड़ने की खबर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों से इस संभावना पर चर्चा के बाद इस्तीफा दे दिया है।
बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया की ताजा रिपोर्ट मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेसेज लिस्ट 2026 के अनुसार, मुकेश अंबानी का परिवार भारत का सबसे अमीर कारोबारी परिवार बना हुआ है। संपत्ति में 8.5 फीसदी की गिरावट के बावजूद अंबानी परिवार की कुल संपत्ति 25.8 लाख करोड़ रुपए दर्ज की गई है।