हनुमना के ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्रों की जांच में खुलासा-आधे से ज्यादा केंद्रों पर हमेशा ताला, बच्चों का पोषण आहार दुकानदारों को बेचा जाता है, खिलौने और सामग्री कार्यकर्ताओं के घरों में, सुपरवाइजर–ठेकेदारों की मिलीभगत से लाखों का गोरखधंधा।

हाइलाइट्स
हनुमना, स्टार समाचार वेब
महिला एवं बाल विकास के आंगनबाड़ी परियोजना हनुमना के अंतर्गत संचालित तकरीबन 50 प्रतिशत ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्रों में अक्सर ताले लटकते रहते हैं। न तो उनकी कभी जांच होती है न ही इन पर कार्यवाही होती। कार्यकर्ताओं एवं सुपरवाइजर तथा मध्यान्ह भोजन के ठेकेदारों की मिलीभगत से यह मनमानी चल रही है। जांच हो तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तकरीबन 50 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों के ताले ही नहीं खुलते। जो बच्चे शासकीय स्कूलों में दर्ज हैं, अधिकांश वही बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में भी दर्ज हैं। इतना ही नहीं एक तो जल्दी इन केंद्रों में कोई बड़े अधिकारी निरीक्षण करने ही नहीं जाते जब कभी अधिकारियों का क्षेत्र में दौरा होता है तो यहां पदस्थ सुपरवाइजर पहले से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सूचना देकर केन्द्रों की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त दिखाया जाता है। स्थिति तो यह है कि अधिकांश केंद्रो की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं हनुमना या फिर रीवा में कमरा लेकर रहती हैं। जब कोई कार्यक्रम अथवा अधिकारियों का दौरा हुआ तो इन सुपरवाइजर द्वारा उन्हें सूचित कर बुला लिया जाता है। आनन फानन में केंद्र में आसपास के स्कूली बच्चों को बुला कर बैठा दिया जाता है।
मिलकर डकार जाते हैं राशि
इन आंगनबाड़ी केंद्रों में मध्यान्ह भोजन के ठेकेदार द्वारा सुपरवाइजर एवं कार्यकर्ताओं की मिली भगत से कागजी घोड़ा दौड़ा कर बिल पास कर लिया जाता है। उक्त राशि में तीनों लोग मिलकर बंदरबांट कर लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के जो आंगनबाड़ी केंद्र खुलते भी है उनमें कभी भी मीनू के आधार पर भोजन नहीं परोसा जाता। कभी खिचड़ी, कभी नमक हल्दी पानी मिली पतली दाल और चावल परोस दिया जाता है। 15 अगस्त, 26 जनवरी को मीनू का पालन हो जाए तो बड़े भाग्य की बात है।
कार्यकर्ताओं के घर पहुंच गये खिलौने
बच्चों के खेलने के लिए महंगे-महंगे खिलौने एवं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न सामग्री का उपयोग सुपरवाइजर एवं कार्यकर्ताओं के घरों में होता है। किसी भी केंद्र में खिलौने नहीं बचे हैं। इसकी जांच कराई जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। लेकिन शिकायत के बाद भी इस गड़बड़ी की ओर शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं देते।
दुकानदारों को बेच दिया जाता है पोषण आहार
बताया जाता है कि बच्चों, धात्री महिलाओं एवं किशोरियों के लिए आने वाला पोषण आहार का वितरण न कर दुकानदारों को बोरी के बोरी बेच दिया जाता हैं। यह बात अलग है कि कुछ जागरूक लोग जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से मिलकर अपने हिस्से का पोषण आहार मांगते हैं तो उन्हें उपलबध करा दिया जाता है। वहीं गोद भराई के लिए आने वाली राशि तो पूरी की पूरी डकारने की बात किसी से छिपी नहीं है।


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