थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले में सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला को आरोप पत्र जारी किया गया है। विभाग ने ब्लड सेंटर संचालन में गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित एचआईवी ब्लड चढ़ाने के मामले में संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बड़ा एक्शन लेते हुए वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) तथा तत्कालीन सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनोज शुक्ला को आरोप पत्र जारी किया है। विभाग ने माना है कि ब्लड सेंटर के संचालन में लापरवाही हुई है। हालांकि संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ संयुक्त संचालक राजू निदरिया ने सीएमएचओ को अपना जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया है और चेतावनी दी है कि यदि समय से जवाब नहीं मिला तो एक पक्षीय कार्यवाही की जाएगी। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 में थैलीसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों को संक्रमण खून चढाने का मामला उजागर हुआ था, जिस पर ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. देवेंद्र सिंह पटेल एवं लैब टेक्नीशियन रामभाई त्रिपाठी एवं नन्द लाल पांडेय को निलंबित करने कि कार्रवाई कि गई थी।
कैसे देना चाहते हैं जवाब अधिकार आपका
संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ संयुक्त संचालक ने आरोप पत्र में सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला को इस बात की छूट दी है कि वे अपना जवाब कैसे देना चाहते हैं? वह माध्यम वे स्वयं चुन लें,यह भी बताएं कि क्या सीएमएचओ व्यक्तिगत सुनवाई चाहते हैं? गवाह का नाम देना चाहते हैं या बचाव में अन्य अभिलेख प्रस्तुत करना चाहते हैं?
आरोप क्रमांक -1
जारी आरोप पत्र में कहा गया है कि डॉ. शुक्ला के कार्यकाल के दौरान जिला अस्पताल सतना के ब्लड सेंटर में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। राज्य स्तरीय जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार रक्तदाताओं का समुचित रिकॉर्ड संधारित नहीं किया गया, ब्लड टेस्ट में उपयोग की गई किटों का विवरण और बैच नंबर दर्ज नहीं किए गए तथा रक्त चढ़ाने से पहले एचआईवी सहित आवश्यक जांच निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं की गईं। आरोप है कि इन कमियों के कारण थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण का मामला सामने आया।
आरोप क्रमांक- 2
आरोप पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ब्लड सेंटर प्रभारी के रूप में डॉ. शुक्ला की जिम्मेदारी थी कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तथा राष्ट्रीय दिशा-निदेर्शों के अनुसार ब्लड सेंटर का संचालन सुनिश्चित करें। लेकिन रक्तदाताओं की स्क्रीनिंग, दस्तावेजों के संधारण और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कई रक्तदाताओं की जानकारी अधूरी थी और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
आरोप क्रमांक -3
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। आपके द्वारा टीम के आगे विभाग की छवि धूमिल की गई।
आरोप क्रमांक- 4
विभाग ने आरोप लगाया है कि अस्पताल परिसर में संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं रखा गया तथा ब्लड सेंटर, हीमोग्लोबिनोपैथी सेंटर, आईसीटीसी और एआरटी सेंटर का नियमित निरीक्षण भी नहीं किया गया। इसके अलावा मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था में भी कई प्रशासनिक कमियां सामने आई हैं। अस्पताल परिसर में पैसे लेकर रक्तदान कराया जा रहा है जिस पर प्रशासन द्वारा एफआईआर भी गई, लेकिन सीएमएचओ द्वारा प्रशासकीय दाइत्व का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया गया जिसपर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मामले में अब तक इनकी गवाही


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