मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान ने दो पदों से इस्तीफा देकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जानें पूरा मामला।

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में नियुक्ति पर विवाद
गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति प विवाद
निकाह काजीमोहन मआज की नाराजगी
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के बाद उपजे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। राजधानी भोपाल के निकाह काज़ी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को अपने दो महत्वपूर्ण पदों—निकाह काज़ी और दीनी तालीमी बोर्ड (जमीयत उलेमा, मप्र) के महासचिव—से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र काजी शहर भोपाल मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी और दीनी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल कलाम कासमी को सौंप दिए हैं।
धार्मिक संस्था की शुचिता का तर्क
इस्तीफा देने के पीछे का मुख्य कारण बताते हुए मआज़ खान ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक विशुद्ध धार्मिक और इस्लामिक संस्था है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी संस्था में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का वे समर्थन नहीं कर सकते। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस फैसले का विरोध होना चाहिए था, उसे स्वीकार कर लिया गया, जो उन्हें मान्य नहीं है।
स्वागत समारोह से आहत हुए काजी
मआज़ खान ने इस बात पर भी गहरी निराशा जताई कि दो दिन पहले काजी शहर भोपाल की उपस्थिति में वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. सनव्वर पटेल का स्वागत किया गया। उन्होंने इसे अपने सिद्धांतों के विपरीत माना और कहा कि जिन लोगों को विरोध करना चाहिए था, उन्होंने स्वागत कर स्थिति को और अधिक असहज बना दिया है।
विवेक और सिद्धांतों पर लिया फैसला
अपने त्यागपत्र में मआज़ खान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कठिन निर्णय अपनी अंतरात्मा और धार्मिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने अपने सहयोगियों और शुभचिंतकों से क्षमा मांगते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इन पदों पर बने रहना उनके सिद्धांतों के अनुकूल नहीं था। गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से ही इस नियुक्ति पर प्रदेशभर में बहस छिड़ी हुई है और निकाह काजी का इस्तीफा इस विवाद का एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

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