इंदौर में भूजल संकट और अंधाधुंध बोरिंग पर एमपी हाई कोर्ट ने राज्य शासन से 2019 की केंद्रीय भूजल नीति के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राज्य में भूजल (Groundwater) संरक्षण और प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य शासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में तैयार की गई भूजल नीति के क्रियान्वयन को लेकर मध्य प्रदेश में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
यह पूरा मामला वर्ष 2019 में भविष्य शर्मा द्वारा अधिवक्ता मनीष विजयवर्गीय के माध्यम से दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1996 में ही सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने केंद्र सरकार को भूजल संरक्षण के संबंध में एक राष्ट्रीय नीति बनाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में भूजल नीति तैयार कर ली थी। चूंकि भूजल राज्य सूची का विषय है, इसलिए इस नीति को धरातल पर लागू करने और इसके क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील मनीष विजयवर्गीय ने कोर्ट के समक्ष चिंताजनक तथ्य रखे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में ही विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा चेतावनी दी गई थी कि देश के लगभग 70 प्रमुख शहरों में भूजल का स्तर शून्य के करीब पहुँच सकता है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यदि समय रहते राज्य सरकार केंद्र द्वारा बनाई गई नीति को मध्य प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू कर देती, तो आज इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में अंधाधुंध बोरिंग और जल संकट जैसी विकट स्थिति उत्पन्न न होती।
राज्य शासन के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि इस याचिका पर पिछली सुनवाई सितंबर 2021 (और इससे पूर्व सितंबर 2019) में हुई थी। पिछले पांच वर्षों की अवधि में भूजल स्थिति और प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव आ चुके हैं। इसलिए शासन को वर्तमान स्थिति और उठाए गए कदमों का ब्योरा प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क पर विचार करते हुए सुनवाई को आगे बढ़ा दिया। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक सरकार नीति के क्रियान्वयन को लेकर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करे। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को नियत की गई है।
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इंदौर में भूजल संकट और अंधाधुंध बोरिंग पर एमपी हाई कोर्ट ने राज्य शासन से 2019 की केंद्रीय भूजल नीति के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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