मप्र से राज्यसभा उम्मीदवारी निरस्त होने पर मीनाक्षी नटराजन की जगह 'बली का बकरा' कौन? 'युवराज' की नाराजगी, हरीश के तेवर और शीर्ष अधिकारियों के बीच 'पेन' वाले संवाद की दिलचस्प इनसाइड स्टोरी। पूरी राजनीतिक हलचल यहाँ पढ़ें। - सुशील शर्मा की कलम से

युवराज के निशाने पर कौन
मप्र से राज्यसभा में न जा पाने से मीनाक्षी नटराजन भले ही निराश हों, लेकिन असली गुस्सा और आक्रोश तो उन नेताजी में होगा, जिनकी कोटरी की सदस्य हैं मीनाक्षी। राज्यसभा उम्मीदवारी का नामांकन निरस्त होने के बाद से लेकर कोर्ट कचहरी तक जो हुआ, उसमें सबसे पहली जिम्मेदारी मीनाक्षी की है, लेकिन दिल्ली दरबार इस मामले में बली का बकरा मप्र में तलाश रहा है। युवराज गुस्से में हैं और उनकी जय जगत कोटरी उस सिर को तलाश रही है, जिसको युवराज के समक्ष पेश कर बली ली जा सके। जानकारों का मानना है कि दो से ज्यादा बड़े पदाधिकारियों की छुट्टी जल्द ही हो सकती है।
हद मत भूलो हरीश
राज्यसभा का नामांकन क्या निरस्त हुआ विपक्षी पार्टी के प्रदेश प्रभारी अपनी हद ही भूल गए है एक प्रेसवार्ता में उन वरिष्ठ नेताजी का ही अपमान करने पर उतर आए, जिनके हरीश जैसे न जाने कितने पट्ठे पार्टी में पदों पर हैं और तो और जिन युवराज की बदौलत वो मध्यप्रदेश के प्रभारी बने हैं उनको भी राजनीति के गुर इन नेताजी ने ही दिए हैं। बहरहाल, नेताजी के अपमान से पार्टी में बड़ा वर्ग आगबबूला है इस अपमान का बदला कैसे और कब लिया जाए, इसकी जुगत लगाई जा रही है।
जब पूछा गया कि पेन कैसे चलता है
मप्र सरकार के मुखिया की बैठक में जाने से पहले शीर्ष अधिकारियों की घिग्गी बंध जाती है। इसकी वजह बैठक शुरू होने के पहले होने वाला संवाद है, जो माहौल को हल्का फुल्का करने के लिए मुखिया करते हैं। मुखिया का अंदाज है कि वे कोई सवाल उछाल देते हैं और अधिकारियों से उसका जवाब पूछते हैं, फिर क्या बैठक की तैयारी करके आए अधिकारी बगले झांकने लगते हैं। ऐसा ही एक वाक्या पेन को लेकर हुआ, जो मुखिया महोदय को बैठक शुरू होने के पहले अधिकारी ने दिया तो मुखिया ने पूछ लिया कि यह पेन कैसे चलता है। फिर क्या था अधिकारी इस सवाल के जवाब से बचने के लिए एक दूसरे के पाले में गेंद उछालने लगे। एक अधिकारी ने एक इंजीनियर अधिकारी की तरफ ईशारा कर दिया कि साहब इंजीनियर है, वे अच्छे से बता पाएंगे।
साहब का वीडियो और इमरजेंसी गेट
प्रदेश के शीर्ष पद से बेदखल होकर दिल्ली भेजे गए बड़े नेताजी का मन दिल्ली में नहीं लगता है। इस कारण गाहे बगाहे अपने मंत्रालय का आयोजन मप्र में करने से नहीं चूकते हैं। हाल ही में उन्होंने अपना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमें वो बस की सीट पर बैठे हैं और बाहर लोगों से हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं, लेकिन जिस सीट पर साहब बैठे हैं वो इमरजेंसी गेट वाली सीट है। अब साहब ने पूरी बस में ईमरजेंसी सीट वाली जगह को क्यों चुना, इसको लेकर चटखारे लिए जा रहे हैं कि साहब को अभी उम्मीद है कि कभी तो इमरजेंसी गेट खुलेगा और वो वापसी करेंगे।
तू बोल तू बोल से अच्छा मत बोलो
विपक्ष के नेताओं में संस्कार गजब के हैं। मीडिया के सामने भी संस्कार दिखाने से नहीं चूकते हैं। माना की आपसी अदावत है, लेकिन इसके चलते तू-तू करना शोभा नहीं देता। मजे की बात यह है कि दोनों मालवा-निमाड से हैं, लेकिन वहां की बोली की मिठास और अपनापन तो जैसे दोनों नेता वहीं छोड़ आए हैं। यदि यही वाक्या सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच हुआ होता तो अब तक दिल्ली दरबार से नोटिस मिल गया होता, लेकिन विपक्ष के दिल्ली दरबार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। यानी ग्रीन सिग्नल हैं कि आगे भी इस तरह की असभ्यता क्षम्य बनी रहेगी।
किसने बताया मीनाक्षी राज
आखिर मीनाक्षी राज को उजागर करने का श्रेय सत्ताधारी दल में हर कोई ले रहा है या विपक्ष के विभीषण को दे रहा है, पर क्या वास्तव में ऐसा ही है या फिर कुछ है जो छिपाया भी जा रहा है। दिल्ली दरबार की मानें तो दिल्ली से एयरलिफ्ट किए गए प्रत्याशी महोदय के साथ, जो वकील साहब आए थे, उनके पास यह जानकारी आंध्र प्रदेश के संगठन के मुखिया के माध्यम से पहुंची थी, जिसे वकील साहब ने इसी पेशे से जुडे एक बड़े सरकारी औहदेदार को दी थी। उसके बाद पूरी रणनीति श्यामला हिल्स पर बनी और नटराजन पर्चे से ही नदारद हो गई।

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