मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नगरीय विकास विभाग में सरकारी खरीदी और SOR की दरों में विसंगतियों को लेकर ACS संजय दुबे व सरकार पर तीखा हमला बोला है। जानिए क्या है पूरा मामला।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे द्वारा एक विभागीय बैठक में कचरा गाड़ियो व अन्य खरीदी दरों की विसंगतियों (अनियमितताओं) को स्वीकार करने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर सरकारी सिस्टम और 'शेड्यूल ऑफ रेट्स' (SOR) पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर SOR की दरों को जानबूझकर बढ़ा रखा है, जिससे भ्रष्टाचार का एक संगठित ढांचा तैयार हो चुका है।
'दूसरों को नसीहत देने से पहले अपना घर देखें अफसर'
ACS संजय दुबे द्वारा कनिष्ठ अधिकारियों को दी गई हिदायत पर पलटवार करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि बड़े अधिकारियों को मातहतों को ज्ञान देने से पहले अपनी कार्यशैली और ईमानदारी का आकलन करना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यह बयान केवल नगर पालिका और नगर निगमों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास हो सकता है। सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि अधिकारियों को पहले अपने विभाग का कामकाज दुरुस्त करना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सही समय आने पर वे इस पूरे मामले में एक बड़ा खुलासा करेंगे।
नगर निकायों में सामानों की खरीदी पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने स्थानीय निकायों में हो रही खरीदी के उदाहरण देते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एक नगर पालिका में मात्र 200 LED बल्ब खरीदने के लिए 60 लाख रुपए का बजट खर्च कर दिया गया। इसी तरह फिनाइल जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदी में भी भारी गोलमाल किया जा रहा है और जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद हो रहा है।
विधायक निधि और बाजार दरों में भारी अंतर का खुलासा
विधायक निधि से स्वीकृत होने वाले विकास कार्यों की दरों का जिक्र करते हुए उमंग सिंघार ने बाजार मूल्य और सरकारी दरों के बीच का अंतर उजागर किया-
पानी का टैंकर: बाजार में जो पानी का टैंकर 60 हजार रुपए में मिलता है, उसे विधायक निधि के जरिए 2.5 लाख रुपए की दर पर स्वीकृत कराया जाता है।
बोरिंग व खनन: बाजार दरों के अनुसार सवा लाख रुपए में होने वाले बोरिंग कार्य के लिए सरकारी फाइलों में 2.5 लाख रुपए तक का भुगतान दिखाया जाता है।
बिजली की डीपी: खुले बाजार में 50 से 60 हजार रुपए में उपलब्ध डीपी (Transformer) के लिए सरकारी सिस्टम में 2 से 2.5 लाख रुपए का खर्च दर्ज किया जाता है।
भ्रष्टाचार का असली कारण अफसर और बढ़ा हुआ SOR
GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल और सरकारी खरीदी में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए सिंघार ने कहा कि जब निर्धारित मानकों का सामान बाजार में कम कीमत पर मिल रहा है, तो जनप्रतिनिधियों को सीधे बाजार से काम कराने की छूट क्यों नहीं दी जाती? उन्होंने कहा कि अक्सर पार्षदों, अध्यक्षों या मेयरों पर भ्रष्टाचार का ठीकरा फोड़ दिया जाता है, जबकि असली भ्रष्टाचार तो प्रशासनिक अफसर SOR की दरें बढ़ाकर कर रहे हैं। इस बढ़ी हुई दरों का पूरा फायदा अफसरों की जेब में जाता है।
बजट आवंटन और भ्रष्टाचार का गणित
बजट का गणित समझाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक पार्षद को 10 से 25 लाख रुपए और विधायक को करीब 2 करोड़ रुपए की निधि मिलती है। वहीं दूसरी ओर, उसी क्षेत्र में विभागों के माध्यम से 200 से 300 करोड़ रुपए और नगरीय निकायों के जरिए 20 से 25 करोड़ रुपए के बड़े काम कराए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि असली और बड़ा भ्रष्टाचार 25 लाख या 2 करोड़ की निधि में होगा या फिर विभागों के जरिए खर्च होने वाले 300 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट में?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को 24 घंटे की चुनौती
उमंग सिंघार ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों को सलाह दी कि यदि वे वास्तव में व्यवस्था में सुधार चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने-अपने विभागों के SOR की दरों को कम करें। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रति गंभीर हैं, तो अगले 24 घंटे के भीतर बैठक बुलाकर SOR दरों की विसंगतियों को दूर करें। हालांकि, उन्होंने यह दावा भी किया कि 24 घंटे तो क्या, 24 दिन या ढाई साल बीत जाने के बाद भी सरकार इस भ्रष्टाचार रोधी कदम को उठाने का साहस नहीं दिखा पाएगी।
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