मध्यप्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक नामांकन 87.2 प्रतिशत रहा, लक्ष्य से 12.8 प्रतिशत कम। नर्मदापुरम पहले, रीवा दूसरे स्थान पर रहा, जबकि इंदौर संभाग का प्रदर्शन सबसे कमजोर पाया गया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 1 से 8 तक के नामांकन के प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सामने ला दिया है। यहां कुल मिलाकर राज्य 87.2 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर सका है। इस आंकडेÞ को भले ही संतोषजनक माना जा रहा हो लेकिन 100 प्रति. नामांकन के लक्ष्य से अब भी करीब 12.8 प्रतिशत की कमी साफ नजर आती है। सबसे बेहतर प्रदर्शन नर्मदापुरम संभाग का रहा, जहां कुल नामांकन 92.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। रीवा संभाग 91.4 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसने सरकारी और निजी दोनों सेक्टर में संतुलित प्रदर्शन किया। जबलपुर (90.1 प्रति.) तीसरे स्थान पर रहा, जहां निजी स्कूलों का प्रदर्शन (91.3प्रति.) सरकारी स्कूलों (89.4 प्रति.) से बेहतर रहा। यह ट्रेंड कई संभागों में देखने को मिला, जहां निजी स्कूलों में बेहतर रिटेंशन है लेकिन कुल संख्या के लिहाज से सरकारी स्कूल अब भी आगे हैं।
मध्य स्तर पर भोपाल-सागर
मध्य स्तर पर शहडोल (88.2प्रति.), भोपाल (87.0 प्रति.) और सागर (87.0 प्रति.) हैं। भोपाल जैसे बड़े शहरी संभाग में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं होना चिंता का विषय है। यहां निजी स्कूलों का प्रतिशत (87.2 प्रति.) भी बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं रहा, जो यह बताता है कि शहरी इलाकों में नामांकन अभियान की पकड़ कमजोर पड़ी है। उज्जैन (86.2 प्रति.) में खासतौर पर निजी स्कूलों का प्रदर्शन (85.3प्रति.) गिरा है, जिसने कुल औसत को नीचे खींचा।
इंदौर संभाग ने चौंकाया
वहीं चंबल (85.6 प्रति.) और ग्वालियर (84.4 प्रति.) में निजी स्कूलों के कमजोर आंकड़े (80-82 प्रति. के बीच) सबसे बड़ा कारण रहे। सबसे चिंताजनक स्थिति इंदौर संभाग (84.0प्रति.) की है, जो प्रदेश में सबसे नीचे है। यहां निजी स्कूलों का नामांकन केवल 81.0प्रति. तक सीमित रहा, जबकि सरकारी स्कूल भी 86.2प्रति. पर ही टिके हैं। इंदौर जैसे बड़े शहरी और आर्थिक रूप से मजबूत क्षेत्र में यह गिरावट कई सवाल खड़े करती है-क्या अभिभावकों का रुझान बदला है, या फिर माइग्रेशन और स्कूल शिफ्टिंग का असर दिख रहा है? राज्य स्तर की तस्वीर भी गहराई से देखने पर दिलचस्प है।
निजी-सरकारी का संतुलन, रीवा पहुंचा नंबर 2 पर
सत्र 2026-27 के नामांकन आंकड़ों में रीवा संभाग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है। कक्षा 1 से 8 तक सरकारी और निजी स्कूलों को मिलाकर रीवा का कुल नामांकन 91.4 प्रति. दर्ज किया गया है, जो राज्य के औसत 87.2प्रति. से काफी बेहतर है। आंकड़ों के अनुसार, रीवा संभाग में कुल 10 लाख 06 हजर 177 बच्चों के नामांकन का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले अब तक 9 लाख 19 हजार 882 बच्चों का पंजीयन हो चुका है। यानी लक्ष्य से केवल करीब 86 हजार बच्चे ही दूर हैं, जो दशार्ता है कि संभाग तेजी से 100 प्रति. नामांकन की ओर बढ़ रहा है। सरकारी स्कूलों की स्थिति भी मजबूत रही है। यहां 5 लाख 83 हजार 925 के लक्ष्य के मुकाबले 5 लाख 32 हजार 675 बच्चों का नामांकन हुआ, जो 91.2प्रति. है। वहीं निजी स्कूलों में भी लगभग समान प्रदर्शन देखने को मिला, जहां 4 लाख 22 हजार 252 लक्ष्य के मुकाबले 3 लाख 87 हजार 207 नामांकन दर्ज हुआ, जो 91.7प् ा्रति. है। रीवा संभाग की खास बात यह है कि यहां सरकारी और निजी दोनों सेक्टर में लगभग बराबर प्रदर्शन हुआ है, जो इसे अन्य संभागों से अलग बनाता है। कई जगहों पर जहां निजी स्कूल पीछे रहे, वहीं रीवा में दोनों ने मिलकर संतुलित परिणाम दिए हैं।
प्रदेश भर की स्थिति
सरकारी विद्यालय
निजी विद्यालय
संभागवार पूरी तस्वीर
संभाग सरकारी निजी कुल
नर्मदापुरम 90.6 93.9 92.4
रीवा 91.2 91.7 91.4
जबलपुर 89.4 91.3 90.1
शहडोल 88.1 88.3 88.2
भोपाल 86.8 87.2 87.0
सागर 86.6 87.8 87.0
उज्जैन 87.2 85.3 86.2
चंबल 87.8 80.8 85.6
ग्वालियर 86.5 81.7 84.4
इंदौर 86.2 81.0 84.0


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