मध्य प्रदेश में 19 मार्च 2026 को विक्रमोत्सव के तहत सभी जिला मुख्यालयों में सूर्य उपासना और सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाटकों का मंचन होगा। जानिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस विशेष पहल के बारे में।
By: Ajay Tiwari
Mar 18, 20267:41 PM
भोपाल | स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश की धरती एक बार फिर अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक चेतना के पुनरुत्थान की साक्षी बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 'विक्रमोत्सव 2026' के भव्य आयोजन की तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य महान सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों, उनके न्याय और शौर्य की गाथाओं को जन-जन तक पहुँचाना है।
19 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (वर्ष प्रतिपदा) यानी सृष्टि के आरंभ दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सूर्य उपासना के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित मुख्य समारोह में सम्मिलित होंगे।
आयोजन की मुख्य विशेषताएँ:
ब्रह्मध्वज की स्थापना: उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर पारंपरिक रूप से ब्रह्मध्वज स्थापित किया जाएगा।
सामूहिक सूर्य उपासना: सभी जिलों में सुबह 10 बजे से सूर्य अर्घ्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शुरू होंगी।
साहित्यिक प्रसार: आम जनता को भारतीय नववर्ष के वैज्ञानिक और ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराने के लिए "भारत का नव वर्ष विक्रम संवत" नामक विशेष पुस्तिका का वितरण किया जाएगा।
संस्कृति विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय (MP School of Drama) द्वारा विशेष नाट्य दलों को तैयार किया गया है। ये दल प्रदेश के हर जिले में जाकर “सम्राट विक्रमादित्य” नाटक का मंचन करेंगे। इस मंचन के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, उनकी वीरता और उज्जैनी की काल गणना के महत्व को जीवंत किया जाएगा।
उत्सव की व्यापकता को देखते हुए राज्य सरकार ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है:
| मुख्य अतिथि | आवंटित जिला |
| नरेन्द्र सिंह तोमर (विधानसभा अध्यक्ष) | ग्वालियर |
| जगदीश देवड़ा (उप मुख्यमंत्री) | मंदसौर |
| राजेन्द्र शुक्ल (उप मुख्यमंत्री) | रीवा |
| कैलाश विजयवर्गीय | धार |
| प्रहलाद सिंह पटेल | नरसिंहपुर |
| विश्वास सारंग | हरदा |
राज्य मंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को भी विभिन्न जिलों जैसे टीकमगढ़, बैतूल, झाबुआ, सागर और अनूपपुर आदि में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई है ताकि यह उत्सव एक जन-आंदोलन का रूप ले सके।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेखांकित किया कि उज्जैन सदियों से ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का केंद्र रहा है। भारतीय काल गणना का आधार विक्रम संवत ही है, जिस पर हमारे सभी तीज-त्योहार आधारित हैं। 15 फरवरी से शुरू हुआ यह विक्रमोत्सव 19 मार्च तक चलेगा, जिसमें देश भर के विद्वान और कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।
पुरस्कारों से नवाजा गया विक्रमोत्सव: > उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष (2025) के विक्रमोत्सव को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। इसे 'ईमैक्सम ग्लोबल अवार्ड' द्वारा 'लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर' और प्रतिष्ठित 'WOW Awards' में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।