नीट-यूजी री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद सतना मेडिकल कॉलेज के एक छात्र का नाम सामने आया है। बिहार पुलिस ने 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कॉलेज प्रबंधन जानकारी जुटा रहा है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी री-एग्जाम में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। बिहार के लखीसराय में आयोजित नीट-यूजी री-एग्जाम के दौरान सक्रिय एक संगठित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस सनसनीखेज मामले में सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र हिमांशु कुमार का नाम भी सामने आया है। मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले के पथरा गांव निवासी हिमांशु पर आरोप है कि वह दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के लिए सॉल्वर बनकर परीक्षा केंद्र पहुंचा था। पुलिस ने उसे अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक गैंग का नेटवर्क फैला है। इस खुलासे ने एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टर बनाने पिता ने बेची थी पैतृक जमीन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हिमांशु नाम का छात्र मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है, लेकिन अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि यह वही है। हालांकि विगत 15 दिनों से वह आवश्यक कारणों के चलते अवकाश पर जिले से बाहर है। मामले की जानकारी लगते ही प्रबंधन द्वारा छात्र की छानबीन की गई लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिली। कैंपस के बाहर बैठे इंचार्ज के पास उसके द्वारा लिखी अवकाश की एप्लिकेशन जरूर मिली है जिसमे पारिवारिक कारणों से ग्राम जाने का जिक्र है। जानकारी के अनुसार सुपौल के जोल्हनिया निवासी हिमांशु सतना मेडिकल कॉलेज का छात्र है। उसके पिता शिवनारायण साह किसान हैं। बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए परिवार ने जमीन तक बेच दी।
6 राज्यों के इन मेडिकल कॉलेज से हायर किए गए सॉल्वर
जांच में पता चला कि नीट री-एग्जाम परीक्षा में परीक्षार्थियों को पास कराने के लिए हायर प्रोफाइल वालों को टारगेट किया गया। इनसे 40 लाख रुपए में मेडिकल कॉलेज में एडमीशन कराने का वादा किया गया। एडवांस में पैसे भी लिए गए। पैसे लेकर उनकी जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठाया गया। इसके लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों में पढ़ रहे मेडिकल कालेजों के छात्रों को हायर किया गया। बताया गया कि इस गिरोह की नजर ऐसे मेडिकल छात्रों पर थी जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत है। इन मेडिकल छात्रों को फर्जी तौर पर सॉल्वर बनकर परीक्षा देने के लिए 15 से 20 लाख रुपए तक का आॅफर दिया जाता है।
बायोमेट्रिक सत्यापन में हुई हेराफेरी
गिरफ्तार आरोपियों में मेडिकल छात्र, बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी और फर्जी परीक्षार्थी शामिल हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में हेरफेर कर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने की साजिश रची थी। पुलिस जांच के अनुसार इस रैकेट का संचालन मेडिकल छात्रों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था। अभ्यर्थियों से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर लाखों रुपये तक की डील की जाती थी। प्रारंभिक भुगतान लेने के बाद सॉल्वर उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता था और बायोमेट्रिक सत्यापन में कथित मिलीभगत के जरिए उन्हें असली परीक्षार्थी के रूप में प्रवेश दिलाया जाता था।
मामले की जानकारी भी मीडिया के माध्यम से ही हुई है। अभी तक कोई प्रशासनिक लेटर नहीं आया है। इस नाम का छात्र कुछ दिनों से अवकाश पर है। छात्र के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
अंबरीश मिश्रा, पीआरओ शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना

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