सतना में एनएचएम के 347 संविदा कर्मियों का करीब 6 करोड़ रुपये पीएफ गायब होने का मामला सामने आया है। राज्यस्तरीय टीम ने जांच शुरू कर दी, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला और भी गंभीर है, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 347 संविदा कर्मियों का 6 करोड़ का पीएफ गायब बताया जा रहा है। गुरुवार सुबह इस कथित ईपीएफ घोटाले की जांच के लिए राज्यस्तरीय तीन सदस्यीय वित्त की टीम अचानक सीएमएचओ कार्यालय पहुंची। टीम ने बिना देरी किए जिला लेखा प्रबंधक (डैम) के कार्यालय में दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी।
गौरतलब है कि दो दिन पहले मैहर भ्रमण में आए हेल्थ एसीएस अशोक वर्णवाल को एनएचएम संविदाकर्मियों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमे ईपीएफ और पीबीआई राशि में घोटाले की शिकायत की गई थी। इन सभी राशियों के लिए डैम सुभाष चंदेल को दोषी ठहराया गया था।
दर्ज किए बयान
जांच अधिकारियों द्वारा बजट पेंडेंसी में गड़बड़ी पर डैम सुभाष चंदेल पर कड़ी नाराजगी जताई गई। डैम से 2021 से 2025 तक के सभी कर्मियों के ईपीएफ चालान की कॉपी पेश करने के लिए कहा गया। इसके अलावा जो जमा नहीं हुए हैं उस रिकार्ड का डाटा भी दिखने के लिए कहा। जांच के अंत में सुभाष चंदेल से निर्धारित फॉर्मेट में कथन भी लिए गए।
साढ़े 6 घंटे चला निरीक्षण
जांच टीम में उपसंचालक वित्त मुमल बोहत, राज्य लेखा प्रबंधक मनोज राजपूत एवं राज्य सलाहकार नीरज श्रीवास्तव शामिल रहे। बताया जाता है कि सुबह साढ़े 11 बजे से टीम ने सीएमएचओ कार्यालय परिसर में स्थित डैम कार्यालय में अपनी करवाई शुरू कर दी थी। जांच के दौरान जिला लेखा प्रबंधक (डैम) सुभाष चंदेल से ईपीएफ घोटाले के बारे में जानकारी मांगी गई तथा सभी रिकार्ड पेश करने के लिए कहा गया, वहीं एनएचएम के एकाउंटेंट लखन गुप्ता को भी बुलाया गया था। बताया गया कि सुबह साढ़े 11 बजे से चली जांच शाम 6 बजे तक चली।
कौन हैं प्रभावित कर्मचारी
प्रभावित कर्मचारियों में 199 एएनएम, 8 ब्लॉक एकाउंट मैनेजर, 8 ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर, 30 डाटा एंट्री आॅपरेटर, 26 डीडीसी फार्मासिस्ट्र 15 डीडीसी सपोर्ट स्टाफ, 10 फीडिंग डेमॉस्ट्रेटर, 33 लैब टेक्नीशियन, 1 सोशल वर्कर, 6 सीनियर ट्रीटमेंट लैब सुपरवाइजर एवं 5 ट्रीटमेंट लैब सुपरवाइजर शामिल हैं। कई एएनएम संविदा से नियमित हो चुकी हैं, फिर भी उनके संविदाकाल का ईपीएफ अब तक जमा नहीं किया गया है।
लग चुकी है 55 लाख रुपए की पेनाल्टी
सूत्रों ने बताया कि विवाद की जड़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला इकाई में पदस्थ डिस्ट्रिक्ट एकाउंट मैनेजर सुभाष चंदेल है। ईपीएफ कटौती के बावजूद कर्मचारियों के ईपीएफ एकाउंट में राशि ट्रांसफर नहीं करने के एवज में पूर्व डीपीएम डॉ. निर्मला पाण्डेय के कार्यकाल के दरमियान ईपीएफ कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग पर 55 लाख रुपए की पेनाल्टी भी लगाई थी।
ईपीएफओ कमिश्नर से की गई शिकायत
बताया गया कि प्रतिमाह 25 हजार रुपए से काम सैलेरी पाने वाले संविदा कर्मियों का 1800 रुपए ईपीएफ हर माह काटा जा रहा है, और इतना ही एनएचएम द्वारा अपनी ओर से जमा किया जाता है। लेकिन बीते चार सालों से यह राशि संविदा कर्मियों के खाते में जमा ही नहीं हुई। धीरे-धीरे यह राशि 6 करोड़ के आसपास पहुंच गई है। कर्मियों द्वारा अक्टूबर -25 में इस मामले की शिकायत सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला से की गई थी लेकिन समस्या समाधान न होने पर कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) कमिश्नर से शिकायत की गई थी।


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