राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 जून को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगी। आर. वेंकटरमण के बाद कार्यकाल के दौरान यहां आने वाली वे देश की दूसरी राष्ट्रपति होंगी। जानिए प्रशासनिक तैयारियों और इतिहास के बारे में।

खंडवा: स्टार समाचार वेब
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आगामी 18 जून को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रस्तावित दौरा बेहद खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है। यदि यह दौरा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो वह अपने कार्यकाल के दौरान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बन जाएंगी। राष्ट्रपति के इस संभावित आगमन को लेकर तीर्थ नगरी और प्रशासनिक गलियारों में भारी उत्साह है।
राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का गौरव अब तक केवल एक पूर्व राष्ट्रपति को मिला है। इससे पहले वर्ष 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ओंकारेश्वर आए थे। उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य जयंती के पावन अवसर पर भगवान आदि गुरु शंकराचार्य के गुरु श्री गोविंद भगवत्पादाचार्य गुफा के जीर्णोद्धार कार्य का लोकार्पण किया था। अब पूरे 36 साल बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस गौरवशाली परंपरा की दूसरी कड़ी बनने जा रही हैं।
देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा और प्रतिभा पाटिल भी ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आ चुके हैं, लेकिन उनका वह दौरा राष्ट्रपति पद पर आसीन होने से पहले या बाद का था। कार्यकाल के दौरान आने वालीं द्रौपदी मुर्मू दूसरी राष्ट्राध्यक्ष होंगी।
राष्ट्रपति के संभावित दौरे को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा व्यवस्था, सुगम दर्शन, आवागमन रूट, रात्रि विश्राम और प्रोटोकॉल से जुड़े सभी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू के स्वागत के लिए मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों के ओंकारेश्वर पहुंचने की संभावना है।
तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक (SP) अगम जैन ने शुक्रवार को ओंकारेश्वर का सघन निरीक्षण किया। अधिकारियों की टीम ने मुख्य मंदिर परिसर, सुरक्षा मार्ग, वीआईपी हेलिपैड और अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन कर संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
ओंकारेश्वर का इतिहास गवाह है कि अब तक देश का कोई भी प्रधानमंत्री अपने पद पर रहते हुए मुख्य ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह तक दर्शन करने नहीं पहुंच सका है। इसके पीछे की वजहें कुछ इस प्रकार हैं:
अटल बिहारी वाजपेयी का दौरा:
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ओंकारेश्वर बांध के भूमि पूजन कार्यक्रम के सिलसिले में यहां आए थे। लेकिन घुटनों में अत्यधिक तकलीफ होने के कारण वे मुख्य ज्योतिर्लिंग मंदिर की सीढ़ियां नहीं चढ़ सके। उन्होंने हेलिपैड परिसर में ही भगवान की पूजा-अर्चना की और पास ही स्थित ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर वापस लौट गए थे।
पीएम नरेंद्र मोदी का दौरा:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ वननेस) के लोकार्पण समारोह में शामिल होने वाले थे। लेकिन ऐन वक्त पर हुई भारी बारिश और नर्मदा नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण सुरक्षा मानकों को देखते हुए उनका यह दौरा स्थगित करना पड़ा था।
इस ऐतिहासिक दौरे को लेकर ओंकारेश्वर के संतों, पुजारियों और स्थानीय नागरिकों में उत्साह का माहौल है। प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रपति के इस दौरे से ओंकारेश्वर में धार्मिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 जून को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगी। आर. वेंकटरमण के बाद कार्यकाल के दौरान यहां आने वाली वे देश की दूसरी राष्ट्रपति होंगी। जानिए प्रशासनिक तैयारियों और इतिहास के बारे में।
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