भोपाल गैस त्रासदी के पर्यावरणीय प्रभावों पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास के क्षेत्रों में भूजल के अब भी दूषित होने की शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति का सत्य केवल स्वतंत्र और वैज्ञानिक परीक्षण से ही सामने आ सकता है।

जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक पेश करने के आदेश
मान्यता प्राप्त लैब से परीक्षण कराने के दिए निर्देश
प्रदूषण नियंत्रण मंडल विशेषज्ञ समिति गठित करे
जबलपुर। स्टार समाचार वेब
भोपाल गैस त्रासदी के पर्यावरणीय प्रभावों पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास के क्षेत्रों में भूजल के अब भी दूषित होने की शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति का सत्य केवल स्वतंत्र और वैज्ञानिक परीक्षण से ही सामने आ सकता है। हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति को मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से ही भूजल के नमूनों का परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। इस केस की अगली सुनवाई 3 सितंबर को तय की गई है, जहां रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्देश जारी होंगे। दरअसल, न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और विवेक जैन की युगलपीठ वर्ष 2004 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका स्व. आलोक प्रताप सिंह ने दायर की थी।
स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले अपशिष्ट के निष्पादन के बावजूद आसपास के कई वार्डों में भूजल के दूषित होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है। इस पर सरकार गंभीर नहीं नजर आ रही है।
स्वतंत्र और वैज्ञानिक परीक्षण
उक्त दावों को गंभीर मानते हुए युगलपीठ ने कहा कि वास्तविक स्थिति का पता केवल स्वतंत्र और वैज्ञानिक परीक्षण से ही लगाया जा सकता है। एमपीपीसीबी विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की जांच कराए और विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी
हाईकोर्ट ने केस की अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरुद्दीन और एमपीपीसीबी की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने पक्ष रखा।
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