रीवा में भ्रष्टाचार मामलों पर कलेक्टर की कार्रवाई को कमिश्नर स्तर पर रोकने के आरोपों से प्रशासनिक विवाद गहराया। शिक्षा घोटाले, अनियमित भुगतान और भू-माफिया मामलों में कार्रवाई ठंडे बस्ते में जाने से सवाल उठे।

हाइलाइट्स:
सतना/रीवा, स्टार समाचार वेब
जब जिले का मुखिया भ्रष्टाचार की जड़ें खोदने निकले और संभाग का मुखिया उस पर खाद-पानी डालने लगे तो व्यवस्था का दम घुटना लाजमी है। रीवा में इन दिनों कुछ ऐसा ही प्रशासनिक विरोधाभास देखने को मिल रहा है। तत्कालीन कलेक्टर ने जिन फाइलों में भ्रष्टाचार के सबूत दफन किए थे कमिश्नर कार्यालय ने उन फाइलों को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा भू-माफिया बेखौफ हैं और दागी अफसर शान से कुर्सियों में जमे हैं। जिले में भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के विरुद्ध प्रशासनिक जंग अब अपनों के बीच ही उलझकर रह गई है। एक ओर जहां तत्कालीन जिला कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के घोटालेबाजों और बीहर नदी का गला घोंटने वाले भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाए, वहीं दूसरी ओर संभाग के कमिश्नर से उन्हें लगातार बैकअप और राहत मिलती रही। आलम यह है कि जिन पर गाज गिरनी थी वो सुरक्षित हैं और कलेक्टर के आदेश फाइलों में दबे पड़े हैं।
आखिर किसके दबाव में है कमिश्नर कार्यालय!
रीवा की जनता पूछ रही है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति केवल भाषणों तक सीमित है। कलेक्टर द्वारा भेजे गए ठोस सबूतों और प्रस्तावों पर कमिश्नर की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच कोई सिंडिकेट काम कर रहा है, कलेक्टर के प्रशासनिक निर्णयों को बार-बार कमजोर करने से क्या शासन की छवि खराब नहीं हो रही है और बीहर नदी के संरक्षण में ठेंगा दिखाने वाले रसूखदारों पर कार्रवाई कब होगी। रीवा में बैकअप का यह खेल अब बेपर्दा हो चुका है। अगर जल्द ही इन मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो ईमानदार अधिकारियों का मनोबल टूटेगा और भ्रष्टाचार की यह जड़ें पूरे संभाग को खोखला कर देंगी।
केस नं. 1 - अनुकंपा नियुक्ति घोटाला
प्रदेश के सबसे बड़े अनुकम्पा नियुक्ति घोटाले की आंच तत्कालीन डीईओ गंगा प्रसाद उपाध्याय तक पहुंची थी। जांच में पाया गया कि बिना सेवा के ही अपनों को नियुक्तियां रेवड़ी की तरह बांटी गई। तत्कालीन कलेक्टर ने 23 जनवरी 2026 को पत्र लिखकर गंगा प्रसाद उपाध्याय के निलंबन और विभागीय जांच की अनुशंसा की थी। पत्र मिलने के बाद कमिश्नर कार्यालय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह रहा कि दोषी अधिकारी बिना किसी दंड के प्राचार्य पद से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने की राह पर हैं।
केस नं. 3 - अनुरक्षण घोटाला : अपनों को दी राहत
रीवा के 6 स्कूलों में बिना काम किए ही 28 लाख रुपए का भुगतान ठेकेदारों को कर दिया गया। जांच में सात लोग दोषी पाए गए थे और 6 के निलंबन का प्रस्ताव भेजा गया था। खास बात यह है कि संभागायुक्त ने छोटे अधिकारियों जिसमें प्राचार्य और एपीसी को तो निलंबित कर दिया गया लेकिन मुख्य भूमिका निभाने वाले डीईओ, रमसा प्रभारी और लेखा अधिकारी को निलंबन से राहत देते हुए केवल विभागीय जांच के आदेश दिए। इसी नरम रुख का फायदा उठाकर आरोपियों को कोर्ट से स्टे मिल गया।
केस नं. 2 - रेड में मिली विसंगतियां भी दरकिनार
तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल ने 13 मार्च 2025 को डीईओ के खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव संभागायुक्त के पास भेजा था। जिसमें तीन गंभीर आधार थे। बजट होने के बावजूद 250 छात्राओं को स्कूटी वितरण में लापरवाही कर भुगतान नहीं किया गया। बजट आवंटन के बाद भी अतिथि शिक्षक मानदेय के भुगतान में जान बूझकर देरी की गई। स्कूलों के रखरखाव के नाम पर हुई वित्तीय अनियमितता प्रमुख वजह थी। परिणाम यह हुआ कि कमिश्नर कार्यालय ने निलंबन की जगह केवल आरोप पत्र जारी करने की औपचारिकता निभाई और अधिकारियों को बचा लिया गया।
केस नं. 4 - बीहर नदी और भू-माफिया
बीहर नदी के किनारे शांति रायल स्टेट और शाही रिवर व्यू जैसी अवैध कालोनियां बसाई जा रही थीं। मलबे से नदी का प्रवाह रोका गया और नालों का स्वरूप बदला गया। तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा ने इस कालोनी को अवैध घोषित कर प्रशासन के कब्जे में लेने और भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। जैसे ही प्रशासन ने शिकंजा कसा कमिश्नर कार्यालय से इन आदेशों पर रोक लगा दी गई। आज नदी का अस्तित्व खतरे में है और भू-माफिया बेखौफ होकर प्लाटिंग कर रहे हैं। आलम यह है कि रीवा का यह प्रशासनिक टकराव चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां निचले स्तर पर कार्रवाई की फाइलें तैयार होती हैं वहीं उक्त स्थल पर उन्हें अभयदान मिल जाता है। इस संरक्षण के कारण न केवल सरकारी खजाने को चूना लग रहा है बल्कि भू-माफियाओं के हौंसले भी बुलंद हो रहे हैं।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

मध्यप्रदेश: बैंक ऑफ बड़ौदा ब्लैक लिस्ट... सरकारी लेनदेन पर प्रतिबंध

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमि-पूजन, 5657 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, पीएम आवास योजना और कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों पर विस्तृत रिपोर्ट।
सीधी के खैरा गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हुए, जबकि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सिंगरौली की अमलोरी कोल माइंस में डंपर 100 फीट गहरी खाई में गिरने से ऑपरेटर की मौत हो गई। हादसे ने खदानों में श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवार पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तिरपाल और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मुआवजा मिलने के बावजूद स्थायी पुनर्स्थापन और बुनियादी व्यवस्थाओं का इंतजार जारी है।
रीवा के सेमरिया स्थित पीएम श्री पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के लिए आई किताबें और शैक्षणिक सामग्री कबाड़ में बेचने का आरोप लगा है। मामले का वीडियो सामने आने के बाद जवाबदेही पर सवाल उठे हैं।
रीवा में प्रवर्तन निदेशालय ने चार प्रमुख संविदाकारों के घर और कार्यालयों पर छापेमार कार्रवाई की। वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर भुगतान और कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सतना के धवारी स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में बिना मीटर सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली उपयोग का मामला सामने आया। बिजली विभाग की जांच में अवैध कनेक्शन पकड़े गए, जिससे निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए।
चित्रकूट में 36.84 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कामदगिरी परिक्रमा मार्ग की गुणवत्ता जांच में खामियां मिलीं। कलेक्टर और प्राधिकरण अध्यक्ष ने मौके पर निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया।
सतना जिला अस्पताल के लेबर रूम में अजगर का बच्चा मिलने से अफरा-तफरी मच गई। घटना ने अस्पताल की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सतना जिले में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। जरूरत के मुकाबले केवल एक-तिहाई खाद उपलब्ध है, जबकि डीएपी का स्टॉक बेहद सीमित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।