रीवा संभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीयन लक्ष्य का सिर्फ 58% पूरा हुआ। 2 लाख से अधिक बच्चे अब भी केंद्रों से दूर हैं, अभिभावकों की उदासीनता और जागरूकता की कमी बड़ी वजह बनी।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के प्रवेश को लेकर महिला बाल विकास विभाग व अभिभावक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस मामले में संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां लक्ष्य के अनुरूप 58 प्रतिशत ही पंजीयन हो पाया है। यानी 2 लाख से अधिक बच्चों ने आंगनबाड़ी केंद्रों का मुह तक नहीं देखा। संभाग के सीधी को छोड़ कर बाकी सभी जिले यलो जोन में है। लिहाजा पंजीयन बढ़ाने के लिये अब आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर पहुंच कर पंजीयन कराने के लिये आदेश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार गत वर्ष रीवा संभाग के रीवा, सीधी, सतना, सिंगरौली, मैहर और मऊगंज जिले में 5 लाख 21 हजार 33 बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीयन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके लिये महिला बाल विकास के अधीन आने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे घर-घर संपर्क कर अपने क्षेत्र के बच्चों का प्रवेश आंगनबाड़ी केंद्रों में कराएं, लेकिन रीवा संभाग में यह अभियान आधा-अधूरा ही रह गया। बताया गया है कि उक्त लक्ष्य के अनुरूप महज 3 लाख 4 हजार 269 बच्चों का पंजीयन ही हो सका। जबकि 2 लाख 16 हजार 764 बच्चे इससे अछूते रह गये। यानी करीब 42 प्रतिशत बच्चों ने आंगबाड़ी केद्रों का मुंह तक नहीं देखा। जो चिंता का विषय बना हुआ है। विभाग द्वारा गातार प्रयास किए जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके है।
अभिभावकों का रुझान नहीं
आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की ओर से सुविधाएं दी गई हैं, इसके बावजूद अभिभावक अपने बच्चों को भेजने की रुचि नहीं दिखा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी के विकल्प के रूप में प्ले स्कूल बड़ी संख्या में खुल गए हैं, जहां पर शुल्क देकर बच्चों को लोग भेज रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपेक्षा के अनुरूप बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों को नहीं मिल पा रहे हैं। वहां भी लोग सीधे स्कूलों में ही भेजते हैं।
दी जाती है प्रारंभिक शिक्षा
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिये हर माह लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। लेकिन जगरूकता की कमी और अभिभावकों की उदासीनता के कारण नामांकन प्रभावित होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है, जहां कई अभिभावक अब भी बच्चों को आंगनवाड़ी भेजने प्रति गंभीर नहीं है।
बड़े जिले रेड जोन में
हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीयन की स्थिति की सूची जारी की गई है। जिसमें 50 प्रतिशत से कम पंजीयन वाले जिलों को रेड जोन में शामिल किया गया है। 50 से 70 प्रतिशत तक यलो जोन और उसके ऊपर ग्रीन जोन में शामिल हैं। रीवा संभाग में सीधी को ग्रीन और शेष जिलों को यलो जोन में रखा गया है। इसी तरह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे प्रमुख जिलों के साथ हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पांढुर्ना, शाजापुर, विदिशा आदि रेड जोन में शामिल हैं।
जिलेवार स्थिति
| जिला | लक्ष्य | पंजीयन | प्रतिशत |
| रीवा | 131984 | 70778 | 53.63 |
| मऊगंज | 46585 | 26826 | 57.59 |
| सीधी | 85102 | 62064 | 72.93 |
| सिंगरौली | 89002 | 54574 | 61.32 |
| सतना | 112616 | 60932 | 54.11 |
| मैहर | 55745 | 29095 | 53.19 |
| कुल | 521033 | 304269 | 58.40 |

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रीवा संभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीयन लक्ष्य का सिर्फ 58% पूरा हुआ। 2 लाख से अधिक बच्चे अब भी केंद्रों से दूर हैं, अभिभावकों की उदासीनता और जागरूकता की कमी बड़ी वजह बनी।
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