रीवा नगर निगम ने मंगलवार को दो अति जर्जर और भयप्रद भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की। एक सरकारी और एक निजी भवन को पूर्व सूचना के बाद खाली करवा कर जेसीबी से गिराया गया। यह कार्रवाई ननि आयुक्त डॉ. सौरभ सोनवणे के निर्देश पर जिला प्रशासन व पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी की गई।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
निगम निगम ने जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है। मंगलवार से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत दो जर्जर भवनों को जेसीबी की मदद से गिराया गया है। इसके पूर्व इन भवनों को खाली कराया गया है। इसमें एक सरकारी व निजी भवन शामिल है। उक्त कार्रवाई ननि आयुक्त डॉ. सौरभ सोनवणे के निर्देश पर की गई है।
बताया गया है कि वार्ड क्रमांक 36 किला रोड स्थित भागवत प्रसाद चैरसिया पुत्र परसादी प्रसाद चैरसिया के भयप्रद भवन को सुरक्षित रूप से ध्वस्त किया गया। गौरतलब है भवन की हालत बेहद खराब होने से निवासियों के लिए खतरा बना हुआ था। उक्त भवन को मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम के अंतर्गत भयप्रद घोषित किया गया था। कार्यपालन यंत्री श्री राजेश सिंह के नेतृत्व में उक्त भवन को हटाने की कार्यवाही की गई। इसी के साथ वार्ड 37 में मछरिया गेट के पास स्थित पीडब्ल्यू के अतिजर्जर भयप्रद भवन को भी हटाने की कार्यवाही की गई। उक्त कार्रवाई नगर निगम, जिला प्रशासन व पुलिस विभाग की मौजूदगी में पूरी हुई। निगम आयुक्त ने बताया कि नियमानुसार अति जर्जर/भयप्रद भवनों को गिराने की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। उक्त कार्यवाही में कार्यपालन यंत्री राजेश सिंह, नायब तहसीलदार यतीश शुक्ला, सहायक यंत्री राजेश मिश्रा, अभिनव चतुवेर्दी, स्वास्थ्य अधिकारी बालगोविन्द चतुवेर्दी, मुरारी कुमार, अतिक्रमण प्रभारी रावेन्द्र शुक्ला, उपयंत्री हरेराम मिश्रा, सुनील मिश्रा, एसएस मिश्रा, अतिक्रमण सहायक ज्ञानेन्द्र द्विवेदी के साथ अतिक्रमण दल एवं शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु पुलिस बल मौजूद रहा।

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इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमि-पूजन, 5657 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, पीएम आवास योजना और कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों पर विस्तृत रिपोर्ट।
सीधी के खैरा गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हुए, जबकि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सिंगरौली की अमलोरी कोल माइंस में डंपर 100 फीट गहरी खाई में गिरने से ऑपरेटर की मौत हो गई। हादसे ने खदानों में श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवार पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तिरपाल और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मुआवजा मिलने के बावजूद स्थायी पुनर्स्थापन और बुनियादी व्यवस्थाओं का इंतजार जारी है।
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रीवा में प्रवर्तन निदेशालय ने चार प्रमुख संविदाकारों के घर और कार्यालयों पर छापेमार कार्रवाई की। वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर भुगतान और कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
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सतना जिला अस्पताल के लेबर रूम में अजगर का बच्चा मिलने से अफरा-तफरी मच गई। घटना ने अस्पताल की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
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