रीवा के संजय गांधी अस्पताल में डीएमएफ से 2 करोड़ की राशि मिलने के बावजूद नई लिफ्ट और केबिल का काम अधूरा है। पीडब्लूडी ईएंडएम की लापरवाही से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
पीडब्लूडी ईएंडएम की लापरवाही संजय गांधी अस्पताल में भर्ती मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रही है। नई लिफ्ट लगाने के लिए डीएमएफ से 2 करोड़ मिले। 1 करोड़ से चार लिफ्ट लगनी थी लेकिन एक भी चालू नहीं हो पाई। मरीज परेशान हैं। पुरानी लिफ्ट आए दिन खराब हो रही हैं। 1 करोड़ से नई केबिल बिछाई जानी थी, वह भी काम अधूरा है।
ज्ञात हो कि संजय गांधी अस्पताल में करीब 11 लिफ्ट लगी थी। इनमें से अधिकांश लिफ्ट ने दम तोड़ दिया है। कई लिफ्ट पुरानी हो चुकी है जो चलने लायक नहीं है। संजय गांधी अस्पताल में चार लिफ्ट ही चल रही हैं। इसमें दो स्टाफ और दो मरीजों के लिए हैं। आए दिन इन लिफ्ट में खामियां आ जाती है। लंबे समय से इन्हें बदल कर नए लिफ्ट की लगाने की योजना चल रही थी। समस्या बढ़ने पर डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने नई लिफ्ट का प्रस्ताव मांगा। डीएमएफ मद से चार नई लिफ्ट के लिए राशि भी स्वीकृति कर दी गई। टेंडर निकाला गया और गुजरात की कंपनी को लिफ्ट सप्लाई और लगाने की जिम्मेदारी मिली। गुजरात की टेक्नो एलिमेटर कंपनी को जिम्मेदारी मिली है। करीब 2 करोड़ रुपए डीएमएफ मद से स्वीकृत किया गया था। इसमें सिर्फ के लिए 1 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है। शेष राशि से अन्य कार्य किए जाएंगे। इसमें केबिल का काम भी शामिल है। केबिल पुरानी हो चुकी है। इन्हें बदलने का काम भी किया जाना है लेकिन काम की गति इतनी धीमी है कि समय पर नई लिफ्ट नहीं लग पाई। महीनों से काम चल रहा है। अक्टूबर में ही दो लिफ्ट शुरू करने का दावा पीडब्लूडी ईएंडएम ने किया था। अब तक एक भी लिफ्ट शुरू नहीं हुई। पीडब्लूडी ईएंडएम की लापरवाही ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है।
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एक लिफ्ट की क्षमता 26 पर्सन की है
संजय गांधी अस्पताल में लगने वाली लिफ्ट की क्षमता भारी भरकम है। यह पैसेंजर कम स्ट्रेचर लिफ्ट होगी। इसमें एक साथ 26 मरीज और उसके परिजन जा सकेंगे। लिफ्ट लगाए जाने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान समय में लोगों को लिफ्ट खराब होने पर बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान समय में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। लिफ्ट की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को सीढ़ियों से आना जाना पड़ता है।
सीधी की कंपनी को मिला था डिस्मेंटल का काम
संजय गांधी अस्पताल में कैंटीन के पास ही चार लिफ्ट लगी हुईं हैं। इन सभी लिफ्ट की हालत खराब हो गई थी। कई बंद थी। इन लिफ्ट को पहले डिस्मेंटल किया जाना था फिर इनकी जगह पर नई लिफ्ट लगानी थी। डिस्मेंटल करने का काम सीधी की कंपनी को मिला था। सभी लिफ्ट को डिस्मेंटल करने के बाद इनकी जगह पर ही नई लिफ्ट काम शुरू कर दिया गया। काम कई महीनों पहले शुरू किया गया लेकिन कंपनी ने बीच में काम बंद कर दिया। इसके कारण ही काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
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केबिल भी नहीं बदली जा सकी
1 करोड़ रुपए डीएमएफ मद से सिर्फ पुरानी केबिलों को बदलने के लिए पीडब्लूडी ईएंडएम को मिला। विभाग पुरानी केबिल तक बदल नहीं पाया है। इसमें भी देरी की जा रही है। विभाग की लापरवाही सिस्टम पर भारी पड़ रहा है। पुरानी केबिलों के कारण हाल ही में गायनी विभाग की ओटी भी जलकर राख हो गई थी। फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार पीडब्लूडी ईएंडएम कर रहा है।


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