रीवा के संजय गांधी अस्पताल में खून की भारी किल्लत। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे 10–15 दिनों से भर्ती, ब्लड न मिलने से जान का खतरा।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
संजय गांधी अस्पताल का ब्लड बैंक दम तोड़ रहा है। खून की मारामारी मची है। थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों की सांसें उखड़ रही हैं। 15 दिनों से बच्चे खून के इंतजार में भर्ती हैं लेकिन उन्हें ब्लड नहीं मिल रहा। खून की कमी के कारण बच्चों की मौत हो रही है। परिवार के सदस्य अब थकने लगे हैं। दूसरे बड़े शहर की तरफ जाने को मजबूर हो रहे।
आपको बता दें कि विंध्य का सबसे बड़ा अस्पताल रीवा में हैं। संजय गांधी अस्पताल में सबसे बड़ा ब्लड बैंक भी हैं। वर्तमान समय में यह खून की कमी से जूझ रहा है। यहां सिर्फ तीन यूनिट ब्लड बचा है और डिमांड हर दिन 50 यूनिट से अधिक है। लंबे समय से ब्लड डोनेशन कैम्प का आयोजन नहीं हुआ। इसके कारण हालात बदतर हो गए हैं। सबसे अधिक परेशानी छोटे छोटे मासूम बच्चों के साथ हो रही है। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे खून के लिए अस्पताल में भर्ती हैं लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल रही। पीडियाट्रिक विभाग में मासूम बच्चे पिछले 10 से 15 दिनों से भर्ती हैं। इन्हें हर महीने खून की जरूरत पड़ती है लेकिन समय पर ब्लड नहीं मिल पा रहा है। इनका हिमोग्लोबिन तेजी से गिर रहा है। जान बचाने के लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा है। जिला प्रशासन ने भी आंखें बंद की हुई हैं। लंबे समय से ब्लड डोनेशन कैम्प तक का आयोजन नहीं किया गया है। यह हालात सिर्फ संजय गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक का नहीं है। जिला अस्पताल और रेड क्रास के ब्लड बैंक भी खाली पड़े हुए हैं। मरीज के परिजन बच्चों की जान बचाने इधर उधर भटक रहे। समाजसेवियों से भी मदद की गुहार लगा रहे लेकिन कोई भी सामने नहीं आ रहा।
जबलपुर तक की लगा रहे हैं दौड़
रीवा जिला में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या करीब 50 है। इन सभी को महीने या दो महीने में ब्लड की जरूरत पड़ती है। इन्हें समय पर ब्लड नहीं मिल पा रहा है। ब्लड बैंक से इन्हें नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है लेकिन वर्तमान हालात काफी खराब चल रहे हैं। यहां सिर्फ तीन यूनिट ब्लड है। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को ब्लड देने के लिए कोई डोनर भी हैं। ऐसे में परिजनों की उम्मीद सिर्फ ब्लड बैंक से बंधी हुई है। लाख कोशिशों के बाद भी प्रबंधन बच्चों की जान नहीं बचा पा रहा है।


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