सतना के सरभंगा बाघ शिकार मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, चार जेल भेजे गए। वन विभाग जांच जारी होने की बात कह रहा है, जबकि निगरानी तंत्र और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सरभंगा के जंगल में बाघ के अवशेष मिलने के मामले में वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें चार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है,जबकि एक आरोपी से वन विभाग रिमांड पर पूछताछ कर रहा है। वन विभाग के अनुसार,3 जुलाई को मझगवां वन परिक्षेत्र के सरभंगा जंगल में एक गड्ढे से बाघ के अवशेष मिले थे। इसके बाद 4 जुलाई को मिन्ता सिंह और रामकुशल सिंह को गिरफ्तार कर चित्रकूट न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने रामकुशल सिंह को जेल भेज दिया, जबकि मिन्ता सिंह को पूछताछ के लिए वन विभाग की रिमांड पर सौंप दिया। इसके बाद 5 जुलाई को हेमराज सिंह,बेटू सिंह और महेंद्र सिंह उर्फ मझिला को भी गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों आरोपियों को भी न्यायिकअभिरक्षा में जेल भेज दिया। वन विभाग ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। घटना से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पूरे मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
नाखून मिलने का दावा, कहां और कैसे मिले इस पर चुप्पी?
वन के निगरानी तंत्र को बाघ के शिकार ने कटघरे में ला खड़ा किया है। यहां के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। एक अदने से चौकीदार ने शिकार कर मामला दबा लिया यह कैसे और किस तरह से संभव था? इधर, वन अमला खुद को मुस्तैद बताने के लिए बाघ के नाखूनों की खोज कर रहा है। वह तमाम माध्यमों से नाखून और दांत मिलने के दावे कर रहा है लेकिन कहां, कैसे और किस प्रकार से यह दांत और नाखून मिले इस पर चुप्पी साधे बैठा हुआ है। जानकारी के मुताबिक पिछले 48 घंटे से वनअमला नाखून और दांत मिलने को लेकर अलग -अलग तरीके से दावे कर रहा है लेकिन इसके प्रमाण देने में संकोच भी सामने आ गया है। वन विभाग के तमाम अफसरों से इस पर जानकारी लेने के कई मर्तबा प्रयास हुए लेकिन उनकी चुप्पी इस बात की खामोश गवाही है कि कुछ खास नहीं कर पाए हैं जिसके चलते केवल अनेक माध्यमों से मामले को चर्चा में लाने का प्रयास किए जा रहे हैं।
किस टास्क में थे अनुभाग अधिकारी
सरभंगा के बियावान में बिंदास घूम रहे बाघ के शिकार ने विभाग के अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। जिस अनुभाग में शिकार जैसा गंभीर मामला दबा लिया गया हो वहां का अनुभाग अधिकारी आखिर कर क्या रहा था? सवाल यह है कि हमेशा कार्य में व्यस्त रहने का दावा करने वाले अनुभाग अधिकारी को आखिर ऐसा क्या टास्क दिया गया था कि वह इतने बिजी हो गए कि उनके अधीनस्थ एक दो नहीं 60 दिन तक बाघ की लाश छिपाए रखे? यह जानते हुए कि सरभंगा के आसपास बाघों का बसेरा है तो निगरानी तंत्र को अलर्ट में क्यों नहीं रखा था? यह अनुभाग अधिकारी अक्सर जंगल के अलावा अन्य विभाग की सेवाओं का दम ठोंकते देखे जाते हैं। लेकिन इतनी फुरसत नहीं मिली कि बाघ की जानकारी ले लेते?
अदना सा बीट गार्ड निलंबित
बाघ के शिकार मामले में वन विभाग फिलहाल अदनों को तलाश रहा है। पहले चौकीदार पर आरोप लगाए और अब अदने से बीट गार्ड को निलंबित कर दिया। जानकारी के मुताबिक मझगवां वनपरिक्षेत्र के करारिया बीट में पदस्थ बीट गार्ड मैथिली शरण पटेल को निलंबित कर दिया गया है। इनके पास अमुआ बीट का प्रभार भी था। यहां सवाल ये है कि 52 साल के इस बीट गार्ड को दूरी के सर्किल का प्रभार क्यों दिया गया था। पटेल को धारकुंडी सर्किल के अमुआ बीट का भी कामकाज सौंपा गया था। यानि साफ है कि बीट गार्ड पटेल को निलंबित करने से विभाग सुर्खियों से दूर कार्यवाहियों की इतिश्री कर लेगा?

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