सतना कृषि उपज मंडी में रिकॉर्ड आवक से कारोबार बढ़ा, लेकिन तुलाई में देरी, जाम, शेड की कमी, बारिश का खतरा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से किसान एवं व्यापारी लगातार परेशान हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
कृषि उपज मंडी इन दिनों किसानों और व्यापारियों की चहल-पहल से गुलजार है। जींस की भारी आवक ने मंडी के कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। कई उपजों के भाव रिकॉर्ड स्तर पर बने हुए हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर संतोष दिखाई दे रहा है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक ऐसी हकीकत भी है, जो मंडी प्रशासन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। मंडी में रोजाना हजारों बोरी कृषि उपज पहुंच रही है। बढ़ती आवक के कारण व्यापारिक गतिविधियां तो तेज हुई हैं, लेकिन इसके साथ ही व्यवस्थागत खामियां भी उजागर होने लगी हैं। किसान बताते हैं कि उपज लेकर मंडी पहुंचने के बाद कई बार उन्हें घंटों तुलाई का इंतजार करना पड़ता है। सुबह से लाइन में लगे किसानों की बारी कई बार देर शाम या रात तक नहीं आती। इससे न केवल समय की बरबादी होती है बल्कि परिवहन और मजदूरी का खर्च भी बढ़ जाता है।
प्रवेश द्वार से शुरू होती है परेशानी
मंडी पहुंचते ही किसानों को पहली चुनौती ट्रैक्टर-ट्रॉली और मालवाहक वाहनों की लंबी कतारों के रूप में मिलती है। आवक बढ़ने पर प्रवेश द्वारों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है। कई किसानों का कहना है कि मंडी परिसर के भीतर वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उपज से भरे वाहन घंटों खड़े रहते हैं। स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब एक ही दिन में बड़ी मात्रा में गेहूं, चना और तिली की आवक होती है। ऐसे समय में मंडी का पूरा ढांचा दबाव में आ जाता है और व्यवस्थाएं चरमराने लगती हैं।
बरसात ने बढ़ाई चिंता
मानसून की दस्तक के साथ किसानों की चिंता और बढ़ गई है। मंडी परिसर के कई हिस्सों में पर्याप्त शेड और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में किसान मजबूरी में अपनी उपज खुले स्थानों पर रखने को विवश हैं। यदि अचानक बारिश हो जाए तो अनाज और दलहन की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। कई किसानों का कहना है कि बारिश के दौरान तिरपाल की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिलती। नमी बढ़ने पर उपज के भाव प्रभावित होते हैं, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।
लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव
मंडी में हर वर्ष करोड़ों रुपए का कृषि कारोबार होता है। किसानों और व्यापारियों से मंडी शुल्क भी नियमित रूप से वसूला जाता है। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। किसानों का आरोप है कि पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर शौचालय या तो अनुपयोगी हैं या उनकी सफाई नियमित नहीं होती। दिनभर मंडी में रहने वाले किसानों के लिए विश्राम स्थल भी अपर्याप्त हैं। महिलाओं और बुजुर्ग किसानों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें खुले स्थानों पर बैठकर घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
तुलाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
किसानों की एक बड़ी शिकायत तुलाई व्यवस्था को लेकर भी है। उनका कहना है कि आवक बढ़ने पर उपलब्ध तुलाई कांटे पर्याप्त नहीं पड़ते। इससे नीलामी में लंबी कतारें लग जाती हैं। किसानों का तर्क है कि जब मंडी में व्यापार लगातार बढ़ रहा है, तो तुलाई सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार भी होना चाहिए। कई किसानों ने अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाने की मांग की है।
व्यापारियों की भी अपनी परेशानियां
मंडी की अव्यवस्थाओं से केवल किसान ही नहीं, व्यापारी भी प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि भीड़ और अव्यवस्थित यातायात के कारण माल की ढुलाई प्रभावित होती है। समय पर नीलामी और तुलाई नहीं होने से व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।
बढ़ता कारोबार, नहीं बढ़ीं सुविधाएं
जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में मंडी में कृषि उपज की आवक और व्यापारिक लेन-देन में वृद्धि हुई है। लेकिन मंडी के भौतिक संसाधनों और सुविधाओं का विस्तार उसी गति से नहीं हो पाया। यही कारण है कि हर सीजन में भारी आवक के दौरान वही समस्याएं दोहराई जाती हैं तुलाई में देरी, जल निकासी की कमी, शेड का अभाव और किसानों की लंबी प्रतीक्षा।


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