सतना जिले में आयुष्मान भारत योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। जिले के 52 प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्र अब तक इंपैनल्ड नहीं हो सके हैं, जिससे ग्रामीण मरीजों को मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा। आईडी न बनने, प्रशासनिक लापरवाही और भुगतान संकट के कारण योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज का लाभ देने का दावा सतना जिले में फेल नजर आ रहा है। शासन ने सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम तो दे दिया लेकिन इन आरोग्य मंदिरों से आयुष्मान का लाभ ही हटा दिया गया। जिले में संचालित 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित उप स्वास्थ्य केंद्र अब तक आयुष्मान योजना में इंपैनल्ड नहीं हो पाए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों के मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस योजना को शुरू हुए कई साल हो गए हैं लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाहियों के चलते यह योजना अभी भी ग्रामीण इलाकों से कोसों दूर है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों या जिला अस्पताल का रुख करना पड़ता है, जहां समय और पैसे दोनों की बरबादी हो रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले की 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) एवं 8 उप स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अभी आयुष्मान योजना में इम्पैनल्ड नहीं हुई है। गौरतलब है कि आयुष्मान योजना के तहत सरकारी और कई प्राइवेट अस्पतालों को पैनल में जोड़ा गया है। इन्हें एम्पैनल्ड हॉस्पिटल कहा जाता है। इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड दिखाने पर पैकेज के मुताबिक कैशलेस इलाज मिलता है। इसमें सर्जरी, दवाएं, टेस्ट और अस्पताल में एडमिट होने का खर्च शामिल होता है।
सीएमएचओ और डीएचओ-2 की नहीं बनी आईडी
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत से अभी भी जिले की 52 शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं को नहीं जोड़ा गया है। इसके पीछे नए सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी-2 (डीएचओ) डॉ. नलिनी शुक्ला की आईडी पासवर्ड जनरेट न होने की वजह बताई गई है। बताया गया कि आयुष्मान योजना से जुड़े भोपाल में बैठे अधिकारी द्वारा कई बार इन दोनों अधिकारीयों की आयुष्मान पोर्टल की आईडी बनाने के लिए कहा गया लेकिन कई जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। मजबूरन ये स्वास्थ्य संस्थाएं अभी भी आयुष्मान भारत योजना से बाहर हैं।
पूर्व सीएमएचओ की आईडी का हो रहा उपयोग
सूत्रों ने बताया कि आयुष्मान योजना से जुड़े विभागीय कार्य के लिए अभी भी पूर्व सीएमएचओ डॉ. एलके तिवारी कि आईडी का ही उपयोग किया जा रहा है। भोपाल आयुष्मान अधिकारियों द्वारा नवागत सीएमएचओ एवं डीएचओ की नई आईडी बनाने पर कई बार जोर दिया गया लेकिन कुछ जिम्मेदारों द्वारा इसे भी नकार दिया गया। आईडी न बनने के चलते कई स्वास्थ्य संस्थाओं में आयुष्मान योजना का कार्य रुका हुआ है।
कैशलेश संस्था का अनुबंध खत्म
जिले के इम्पैनल्ड अस्पतालों में आयुष्मान योजना अंतर्गत हितग्राहियों के इलाज का खर्च उठाने वाली भोपाल की एमडी इंडिया कंपनी का अनुबंध भी खत्म हो गया गया है। यह अनुबंध 31 दिसंबर 2025 को ही समाप्त हो गया है। अनुबंध के बाद कई निजी अस्पतालों का पूर्व में भर्ती आयुष्मान हितग्राहियों के इलाज का भुगतान नहीं किया गया। जिसके चलते जिले के आयुष्मान इम्पैनल्ड निजी अस्पतालों का लाखों का बिल बकाया है। अटके बिल के चलते निजी अस्पतालों द्वारा नए मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने लगाए आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उन्हें स्थानीय पीएचसी में योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण गरीब वर्ग को योजना का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई मरीजों ने मांग की है कि सतना के स्वास्थ्य केंद्र को जल्द से जल्द आयुष्मान योजना में इंपैनल्ड किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर ही मुफ्त इलाज संभव हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देता है और आयुष्मान योजना का लाभ आम जनता तक सही तरीके से पहुंच पाता है।


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