सतना के धवारी स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में बिना मीटर सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली उपयोग का मामला सामने आया। बिजली विभाग की जांच में अवैध कनेक्शन पकड़े गए, जिससे निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिस परिसर को नवाचार, उद्यमिता और आधुनिक शहरी विकास का प्रतीक माना जाता है, वहीं यदि बिजली की आपूर्ति चोरी के सहारे चलती मिले तो यह केवल एक विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। धवारी स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में बिजली विभाग की जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही दोनों पर बहस छेड़ दी है। शुक्रवार को मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान इनक्यूबेशन सेंटर की दुकानों में बिना मीटर के सीधे स्मार्ट सिटी के ट्रांसफॉर्मर से बिजली उपयोग किए जाने का मामला सामने आया।
डीई ने दी चेतावनी, दोबारा मिला अवैध कनेक्शन तो होगी कार्रवाई & पैरलल जांच में इनक्यूबेशन सेंटर पहुंची टीम को जांच में करीब आधा दर्जन दुकानें अवैध कनेक्शन के सहारे संचालित होती पाई गईं। विभागीय टीम ने तत्काल अवैध कनेक्शन काटने की कार्रवाई की, जिससे परिसर में हड़कंप की स्थिति बन गई। टीम ने मौके पर पाया कि यहां स्थापित सभी दुकानें बगैर मीटर के संचालित हो रही थी वहीं डायरेक्ट ट्रांसफार्मर से एसी भी चलाया जा रहा था। हालाँकि टीम ने प्रकरण तो नहीं बनाया पर लेकिन कार्यपालन अभियंता द्वारा सख्त लहजे में समझाइस दी गई। ट्रांसफार्मर से वैद्य कनेक्शन लेकर ही बिजली का उपयोग करें अन्यथा दोबारा अवैध कन्नेक्शन मिलने पर प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
22 कनेक्शनों की जांच, 4 पर प्रकरण दर्ज
बताया गया कि इस समय शहर संभाग में कार्यपालन अभियंता मृगेन्द्र सिंह चंदेल के निर्देशन में धवारी, जवाहरनगर और राजेंद्र नगर क्षेत्रों में दो अलग-अलग टीमों ने समानांतर जांच अभियान चलाया। स्मार्ट मीटरों की जांच के साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों का भी निराकरण किया गया। पहली टीम का नेतृत्व स्वयं कार्यपालन अभियंता ने किया। उनके साथ सहायक अभियंता अवनीश पाण्डेय, कुलदीप मिश्रा, कनिष्ठ अभियंता अजय दुबे सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे। इस टीम ने 12 कनेक्शनों की जांच कर दो प्रकरण दर्ज किए। दूसरी टीम का नेतृत्व सहायक अभियंता रामविनीत तिवारी ने किया। उनके साथ कनिष्ठ अभियंता इशरार अहमद, मानवेन्द्र नंदन और प्रशिक्षु अधिकारी अदिति तिवारी मौजूद रहीं। इस टीम ने 10 कनेक्शनों की जांच कर दो अन्य प्रकरण बनाए।
सवाल सिर्फ चोरी का नहीं निगरानी का भी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन दुकानों में लंबे समय से बिना मीटर बिजली उपयोग हो रहा था, वहां यह व्यवस्था कब से चल रही थी और इसकी जानकारी किसे थी? यदि स्मार्ट सिटी के ट्रांसफॉर्मर से सीधे कनेक्शन लेकर दुकानें संचालित हो रही थीं, तो नियमित निगरानी तंत्र इस दौरान क्या कर रहा था?

सीधी के खैरा गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हुए, जबकि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सिंगरौली की अमलोरी कोल माइंस में डंपर 100 फीट गहरी खाई में गिरने से ऑपरेटर की मौत हो गई। हादसे ने खदानों में श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवार पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तिरपाल और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मुआवजा मिलने के बावजूद स्थायी पुनर्स्थापन और बुनियादी व्यवस्थाओं का इंतजार जारी है।
रीवा के सेमरिया स्थित पीएम श्री पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के लिए आई किताबें और शैक्षणिक सामग्री कबाड़ में बेचने का आरोप लगा है। मामले का वीडियो सामने आने के बाद जवाबदेही पर सवाल उठे हैं।
रीवा में प्रवर्तन निदेशालय ने चार प्रमुख संविदाकारों के घर और कार्यालयों पर छापेमार कार्रवाई की। वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर भुगतान और कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सतना के धवारी स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में बिना मीटर सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली उपयोग का मामला सामने आया। बिजली विभाग की जांच में अवैध कनेक्शन पकड़े गए, जिससे निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए।
चित्रकूट में 36.84 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कामदगिरी परिक्रमा मार्ग की गुणवत्ता जांच में खामियां मिलीं। कलेक्टर और प्राधिकरण अध्यक्ष ने मौके पर निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया।
सतना जिला अस्पताल के लेबर रूम में अजगर का बच्चा मिलने से अफरा-तफरी मच गई। घटना ने अस्पताल की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सतना जिले में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। जरूरत के मुकाबले केवल एक-तिहाई खाद उपलब्ध है, जबकि डीएपी का स्टॉक बेहद सीमित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सतना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई। मैहर से रेफर गर्भवती महिला को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिली, जिससे उसे पैदल लेबर रूम तक जाना पड़ा। वार्ड बॉय की अनुपस्थिति भी उजागर हुई।

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