सतना जिले में झूरी नदी के पुनर्जीवन के लिए 5 करोड़ की योजना पर काम जारी है। 131 चेकडैम और अन्य संरचनाओं से जल संरक्षण बढ़ेगा और भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
बारिश के बाद सूख जाने वाली मंदाकिनी की सहायक झूरी नदी को अब फिर से जीवन देने की तैयारी है। जिला प्रशासन एवं वन विभाग ने जल संरक्षण की कई संरचनाएं बनाकर नदी में पानी रोकने की ठोस योजना शुरू की है। गुरुवार को कलेक्टर और वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर इन कार्यों का निरीक्षण किया और गुणवत्ता को संतोषजनक बताया।
संवरने में 5 करोड़ का खर्च
वन परिक्षेत्र चित्रकूट के बीट सेन्धौन अंतर्गत ग्राम बटोही में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झूरीनाला पर जल संग्रहण और उपचार के बड़े काम चल रहे हैं। ये सभी कार्य जिला खनिज मद से स्वीकृत हैं और इनका मकसद सूखती झूरी नदी को पुनर्जीवित करना है। इसके लिए 5 करोड़ की योजना बीते वर्ष बनाई गई थी। अब करीब 20 फीसदी काम बाकी है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर और वनमण्डलाधिकारी ने स्टॉपडेम, तालाब, परकोलेशन टैंक और लूज बोल्डर चेकडैम जैसी संरचनाओं को करीब से देखा। अधिकारियों ने पाया कि अधिकांश निर्माण कार्य गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप हैं और सही दिशा में किए जा रहे हैं।
मंदाकिनी की सहायक नदी
झूरी नदी, मंदाकिनी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है, लेकिन हर साल बारिश खत्म होते ही सितंबर-अक्टूबर तक इसका जलस्तर तेजी से गिर जाता है और कई हिस्सों में नदी पूरी तरह सूख जाती है। इसका असर सीधे तौर पर आसपास के गांवों और वन्यजीवों पर पड़ता है, जिन्हें पानी के लिए भटकना पड़ता है। आधिकारिक जानकार बताते हैं कि यह नदी 7-8 किलोमीटर में बहती है जिसमें से 50 फीसदी सूख जाती है बाकी भमका के पास से इसमें पानी रहता है। सूखे भाग को पुर्नजीवन देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भूजल बढ़ाने पर जोर
झूरी नदी में जल रोकने और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर संरचनाएं बनाने का फैसला लिया। अब तक 131 चेकडैम, 3 परकोलेशन टैंक, 2 तालाब और 5 स्टॉपडेम का निर्माण पूरा किया जा चुका है जबकि बाकी कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। इन संरचनाओं के जरिए बारिश के पानी को रोककर धीरे-धीरे जमीन में उतारा जाएगा, जिससे नदी में लंबे समय तक पानी बना रह सकेगा।
बरसात बाद पता चलेगा प्रभाव
अधिकारियों का कहना है कि आगामी बारिश के मौसम में इन संरचनाओं का वास्तविक प्रभाव सामने आएगा। इससे न केवल झूरी नदी का जलस्तर सुधरेगा, बल्कि ग्राम बटोही और आसपास के वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और वन्यजीवों को भी सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कार्यों की गुणवत्ता और संभावित सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए संतोष जताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण के ऐसे और प्रस्ताव तैयार किए जाएं, ताकि जिले के अन्य सूखते जलस्रोतों को भी पुनर्जीवित किया जा सके।


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