सतना मंडी में चना और मसूर की आवक बढ़ी, लेकिन एमएसपी पर खरीदी के आंकड़े सामने नहीं आए। कम कीमतों और स्लॉट की कमी से किसान परेशान, सिर्फ 5 प्रतिशत ही बेचने तैयार।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सरकार भले ही समर्थन मूल्य में किसान का चना और मसूर खरीद रही है लेकिन यहां जो स्थिति है वह प्रश्न खडेÞ कर रही है। दोनों ही जिंस मंडियों में खूब बिक रही है लेकिन समर्थन मूल्य में बेचने को लेकर कोई तैयारी नहीं है या फिर जिम्मेदार आंकडेÞ छिपा रहे हैं। सतना की कृषि उपज मंडी के मार्च से लेकर चालू माह तक के आंकडेÞ बताते हैं कि चना और मसूर की आवक लगभग बराबर बनी हुई है लेकिन एमएसपी को लेकर कोई आंकड़ा सामने नहीं आ सका है जबकि दो सैकड़ा किसानों ने स्लॉट बुक किए थे।
जानकारी के मुताबिक चना और मसूर की समर्थन मूल्य पर खरीदी 1 अप्रैल से हो चुकी है। 23 दिन बीत जाने के बाद भी कितनी खरीदी गई यह आंकड़ा न तो सामने आ सका है और न ही बताया जा रहा है। जिससे यह माना जा रहा है कि इन दोनों जींस को लेकर किसानों की रूचि ठीक नहीं है जो कि जिम्मेदारों के गले नहीं उतर पा रही है। दूसरी ओर मंडी में चालू माह के पहले पखवाडेÞ में चना 510 टन और मसूर 438 टन बिक चुकी है। इसके अलावा चालू पखवाडेÞ में अब तक चना 168 टन और मसूर 51 टन बिक चुकी है।
चना: 4-8 सौ नीचे ही रहे दाम
चना की आवक भले ही मंडी में ठीक ठाक रही हो लेकिन एमएसपी के रेट को नहीं छू पाए। यह 400 से 700 के आसपास नीचे ही रहे आए। मार्च के पहले पखवाड़े में चना की आवक 127.653 टन रही और मॉडल दर 5200 रुपए दर्ज की गई। महीने के दूसरे हिस्से में आवक बढ़कर 218.049 टन पहुंची लेकिन मजबूत मांग के चलते मॉडल दर 5400 रुपए तक चढ़ गई। जबकि यह एमएसपी से 4 सौ 75 रुपए कम रहे। वहीं, अप्रैल की शुरूआत में स्थिति पूरी तरह बदल गई। 1 से 15 अप्रैल के बीच चना की आवक 510.696 टन पहुंच गई जो पूरे सीजन की सबसे ज्यादा आवक रही। इस भारी सप्लाई ने बाजार का संतुलन बिगाड़ दिया और मॉडल दर गिरकर 5000 रुपए रह गई। जो कि समर्थन मूल्य से 875 रुपए कम है। यहीं नहीं न्यूनतम कीमत 2755 रुपए तक पहुंचना। हालांकि 15 से 23 अप्रैल के बीच आवक घटकर 168.733 टन रह गई जिससे बाजार में हल्की रिकवरी आई और मॉडल दर 5080 रुपए तक सुधर गई। इसके बाद भी 7 सौ 95 रुपए कम ही बने हैं।
मसूर : बढ़े-गिरे लेकिन छू पाए
मसूर के आंकड़े अलग ही कहानी बयां करते हैं। 1 से 15 मार्च के बीच आवक 165.754 टन और मॉडल दर 5750 रुपए रही। जो कि 1250 रुपए एमएसपी के दर से कम रहे। 16 से 31 मार्च में आवक बढ़कर 367.861 टन हो गई, लेकिन इसके बावजूद मॉडल दर 5885 रुपए तक पहुंच गई। यह रेट भी 1115 रुपए कम रहा। अप्रैल के पहले पखवाड़े में आवक और बढ़कर 438.360 टन हो गई, फिर भी कीमतों में गिरावट नहीं आई। उल्टा मॉडल दर 6000 रुपए और अधिकतम भाव 7300 रुपए तक पहुंच गया। 15 से 23 अप्रैल के बीच आवक अचानक घटकर 51.959 टन रह गई, लेकिन कीमतें 6000 रुपए के ऊपर ही बनी रहीं और मॉडल दर 6050 रुपए दर्ज हुई। यह अंतिम अंतिम में 950 रुपए कम रहा।
5 फीसदी ही फसल बेचने को तैयार
जिले में चना के लिए कुल 1 हजार 8 सौ 94 किसानों ने पंजीयन कराया है जबकि मसूर के लिए 2 हजार 1 सौ 58 किसान रजिस्टर हैं। इस तरह दोनों फसलों को मिलाकर कुल 4 हजार 52 किसान उपार्जन के लिए पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 2 सौ 2 के ही स्लॉट बुक हो पाए हैं। यानी कुल पंजीकृत किसानों का महज करीब 5 प्रतिशत ही अपनी फसल बेचने के लिए तैयार हैं। सरल शब्दों में कहें तो हर 20 किसानों में से सिर्फ 1 किसान को ही अभी स्लॉट मिल सका है। इसके लिए आठ केन्द्रों की स्थापना की गई है।
अन्य राज्यों में बकायदा खरीदी हो रही है। हमारे राज्य के पास रूपया पैसा नहीं है। यही कारण कि यहां हर काम धीमा है। बताइए, ऐसे में सीजन निकल जाएगा फिर सब ठन ठन गोपाल।
जगदीश सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (अरा.)
मंडी को चलाने के लिए आवश्यक है। नियमन सभी काम हो रहे। जो किसान भाई आएंगे उनकी जींस की बिक्री जिम्मेदारी से कराई जा रही है।
करुणेश तिवारी, सचिव, कृषि उपज मंडी

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