मौहारी स्टील सायलो की क्षमता भरने से गेहूं खरीदी रुकी, किसानों को लंबी कतारें, टोकन व्यवस्था नहीं, रेऊरा शिफ्ट की अनिश्चितता, 400 ट्रैक्टर पहुंचने से हालात बिगड़े, उगाही आरोपों से व्यवस्था सवालों में घिरी हुई

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मौहारी के स्टील सायलो का कोटा फुल हो गया हैं जिस कारण यहां उपार्जन बंद कर दिया गया। इसकी क्षमता 17 हजार मीट्रिक टन थी। आधिकारिक रूप से कहा जा रहा है कि इससे जुड़ी तमाम समितियों का उपार्जन रेऊरा के सायलो बैग में शिफ्ट किया जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि स्टील सायलो में एक दो दिन और उपार्जन संभव है। इस तरह की दोहरी बातों के बीच किसान फंसा हुआ है जिसके चलते उसकी परेशानी और बढ़ गई है। परेशानी का एक कारण यह भी है कि अगर रेऊरा में शिफ्ट किया गया तो यहां की समितियां मिलाकर 10 का लोड आ जाएगा। ऐसे में जिम्मेदार क्या निर्णय लेंगे यह एक दो दिन में साफ हो जाएगा। रेऊरा सायलो बैग की क्षमता करीब 50 हजार मीट्रिक टन बताई गई है।
400 ट्रैक्टर पहुंचे तो खरीदी ठप
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की व्यवस्था मौहारी स्थित स्टील सायलो प्लांट पर चरमरा गई है। एक ही केंद्र से पांच समितियों सितपुरा, कुलगढ़ी, पिथौराबाद, नवस्ता और श्यामनगर को जोड़ देने से हालात ऐसे बने कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कई-कई दिन कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है फिर भी तौल नहीं हो पा रही। शनिवार को करीब 400 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पहुंचते ही व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई और सायलो प्रबंधन ने सुरक्षा का हवाला देकर खरीदी अस्थायी रूप से रोक दी।
कतार में चार दिन बीते
खरीदी बंद होने की सूचना मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। किसानों ने आरोप लगाया कि न तो प्रशासन ने स्पष्ट शेड्यूल या टोकन सिस्टम लागू किया है और न ही सायलो प्रबंधन ने क्षमता के हिसाब से लोड तय किया। नतीजा, किसान 4-5 दिन तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
सामान्य किसान पीछे धकेले
अव्यवस्था के बीच उगाही के आरोप भी सामने आए हैं। किसानों का कहना है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग 500 से 1000 रुपए लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीधे अंदर प्रवेश दिला रहे हैं। इससे कतार व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। पैसे देने वाले जल्दी तौल करा रहे हैं जबकि छोटे और सामान्य किसान पीछे धकेले जा रहे हैं।
प्रशासनिक भूल का नतीजा
किसानों का कहना है कि पांच समितियों का लोड एक ही सायलो पर डालना ही मूल समस्या है। अलग-अलग दिनों में खरीदी, टोकन आधारित एंट्री, और प्रति दिन तय क्षमता जैसी व्यवस्था न होने से भीड़ बेकाबू हो रही है। किसानों ने मांग की है कि तत्काल अलग-अलग स्लॉट तय किए जाएं। पारदर्शी टोकन सिस्टम लागू हो, सुरक्षा बल तैनात किए जाएं और उगाही पर सख्ती से रोक लगे।
अभी एक दो दिन बाद भी बता पाउंगा। किसान परेशान न हो उनकी उपज का दाना दाना खरीदा जाएगा। कानून व्यवस्था बनाए रखें और अफवाहों में ध्यान न दें यह गुजारिश भी है।
सम्यक जैन, जिला आपूर्ति अधिकारी
अधिकारियों को छोड़िए रोज प्रयोग करने से हालात बने हैं। किसान को कभी कुछ कभी कुछ झेलना पड़ रहा है। इसके लिए आंदोलन करेंगे। 4 मई को तारीख निश्चित है।
जगदीश सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (अरा.)


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