सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज में पाइपलाइन फटने से पानी सप्लाई बंद हो गई, जिससे 650 से अधिक छात्र, डॉक्टर और परिवार प्रभावित हुए, लिफ्ट बंद होने और परीक्षाओं से पहले संकट और गहराया है

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शासकीय मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इंटरनल पाइपलाइन फटने के कारण शुक्रवार रात से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। पाइपलाइन फटने के कारण पूरा पानी परिसर में बह रहा है। हालात यह हैं कि पीने के लिए वाटर कूलर तक सूखे पड़े हैं और हाथ धोने के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में छात्र और डॉक्टर नीचे से बाल्टियों में पानी भरकर ला रहे हैं। शनिवार की दोपहर तक टंकियों में स्टोर पानी ही सप्लाई किया गया। पाइपलाइन नहीं बनी तो हालत और बिगड़ सकते हैं। इसके अलावा लिफ्ट बंद होने से परेशानी और बढ़ गई है।
650 से अधिक लोग प्रभावित
बताया गया कि मेडिकल कॉलेज में रोजाना 3 लाख लीटर पानी की खपत होती है और वर्तमान में सभी स्त्रोत बोरिंग के पानी के भरोसे है। जल संकट से कॉलेज परिसर में रहने वाले 650 से अधिक लोग प्रभावित हैं। इनमें करीब 450 यूजी छात्र-छात्राएं, 200 डॉक्टर परिवार के सदस्य और 200 सीनियर व जूनियर रेजिडेंट शामिल हैं। पानी की किल्लत के चलते सभी को बाहर से पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है।
एक्जाम को सिर्फ दस दिन बचे
छात्रों और डॉक्टरों का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत वाशरूम उपयोग और कपड़े धोने में हो रही है। रोजमर्रा की सामान्य दिनचर्या तक प्रभावित हो गई है। ऐसे समय में जब परीक्षाएं महज 10 दिन दूर हैं, यह समस्या और गंभीर हो गई है। छात्रों ने बताया कि पानी की व्यवस्था के लिए उन्हें बार-बार नीचे जाना पड़ रहा है, जिससे पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। लिफ्ट बंद होने के चलते पूरा समय पानी ढोने में ही निकला जाता है ऐसे में पढाई कैसे होगी?
सालों से 10 से अधिक लिफ्ट बंद
जानकारी के मुताबिक मेडिकल कॉलेज की 10 से अधिक लिफ्ट सालों से बंद पड़ी है जिसके लिए कई बार पत्राचार भी किया गया है। यहां तक कि चिकित्सकों ने अपने पैसे से कुछ लिफ्ट के मेंटेनेंस की बात भी कही लेकिन इस पर एनुअल मेंटेनेंस का पेंच फंसाया गया है। चिकित्सकों को जवाब दिया गया कि जब तक सभी लिफ्ट का एएमसी यानि एनुअल मेन्टेन्स नहीं होता किसी भी लिफ्ट को सही नहीं किया जाएगा।
पाइप लाइन के कार्य में भ्रष्टाचार की बू
बताया जा रहा है कि कॉलेज की इंटरनल पाइपलाइन साल में यह पांचवीं बार फूटी है। इसका मुख्य कारण पाइपलाइन की कम मोटाई बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जहां 80 एमएम मोटाई की पाइपलाइन डाली जानी थी, वहां केवल 40 एमएम की पाइप लगाई गई है, जबकि रिकॉर्ड में 80 एमएम ही दर्शाया गया है। कम मोटाई के कारण पाइप पानी का दबाव सह नहीं पाती और बार-बार टूट जाती है। इस पूरे मामले में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संभावित भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठ रहे हैं। बार-बार एक ही समस्या सामने आने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। प्रभावित छात्र-छात्राओं और डॉक्टरों ने जल्द से जल्द पानी की सप्लाई बहाल करने और पाइपलाइन की स्थायी मरम्मत की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सके।
बजट न आने के कारण कई कार्य प्रभावित हैं। विभागीय पत्राचार किया गया है। पानी की समस्या के लिए पूर्व बिल्डर को बुलाया गया है। छतिग्रस्त पाइपलाइन को सही कराया जा रहा है। जहां तक बात लिफ्ट मेंटेनेंस की है तो लिफ्ट के लिए बजट आवंटन हुआ था लेकिन कम बजट के चलते पीडब्ल्यूडी ने कार्य नहीं किया। इस वर्ष और बजट मिलने का अनुमान है।
डॉ. एस पी गर्ग, डीन, शासकीय मेडिकल कॉलेज, सतना


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