सतना जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स मशीन कई दिनों से बंद पड़ी है, जिससे डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोगियों को ब्लड बैंक से प्लेटलेट्स और प्लाज्मा नहीं मिल पा रहा है। परिजन निजी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं। एफेरेसिस मशीन की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक नहीं मिली मंजूरी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल में भर्ती डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य मरीजों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इन मरीजों को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स या प्लाज्मा नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। मरीज के परिजन प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए निजी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं। बताया गया कि बीते पांच दिन से जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स सेपरेशन करने वाली मशीन खराब पड़ी है। मशीन को बनाने के लिए इंजीनियर भी आया लेकिन मशीन चालू नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 15 यूनिट प्लेटलेट्स की डिमांड बनी रहती है। इस बरसाती मौसम में तो सबसे ज्यादा डेंगू और चिकनगुनिया से पीड़ित कई मरीज भर्ती किये जा रहे हैं,जिनकी प्लेटलेट्स लगातार गिरती जाती हैं उन्हें बचने के लिए प्लेटलेट्स चढ़ाना आवश्यक रहता है।
शिकायत के बाद भी नहीं बनी मशीन
बताया गया कि पिछले सप्ताह प्लेटलेट्स एजियेटर मशीन खराब हुई थी, जिसे बनाने के लिए इंजीनियर को बुलाया गया। बनाने के बाद कुछ दिन मशीन चली लेकिन बंद हो गई। इसके बाद 30 जुलाई से प्लेटलेट्स से ही जुडी मशीन सेंट्रीफ्यूज रेफ्रिजरेटेड खराब हो गई। इसे बनाने के लिए भी इंजीनियर को बुलाया गया। इंजीनियर आये और बना कर चले गए लेकिन मशीन चालू नहीं हुई। बताया गया कि मशीन बनाने ऑनलाइन कम्प्लेन किया गया, जिस पर मशीन बनाने वाली कंपनी के असिस्टेंट ने बताया कि जिला अस्पताल में स्थापित प्लेटलेट्स से जुडी रेमी की सेंट्रीफ्यूज रेफ्रिजरेटेड मशीन कई साल पुरानी है, जिसके पार्ट कम उपलब्ध हो पाते हैं, इसके इंजीनियर भी विरले ही मिलते हैं। अस्पताल विषेशज्ञों ने बताया कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित प्लेटलेट्स सेपरेशन मशीन का अनुबंध आउटसोर्स कंपनी सूर्या चैरिटेबल ट्रस्ट से है जो कि भोपाल में स्थापित है।
एफेरेसिस यूनिट लगाने जनप्रतिनिधियों को देना होगा ध्यान
जिला अस्पताल में बढ़ते प्लेटलेट्स की डिमांड के बाद भी आज तक एफेरेसिस यूनिट मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. देवेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि बढ़ते डिमांड को देखते हुए जिला अस्पताल में इस यूनिट की बड़ी आवश्यकता है। इस मशीन को स्थापित करने बिगत 6 माह पहले डयरेक्ट्रेट को पत्र भी लिखा गया था, जिस पर आज तक अमल नहीं किया गया। जिले का दुर्भाग्य यह भी है कि यहां के किसी जनप्रतिनिधि ने भी इस मशीन को स्थापित करने आवाज नहीं उठाई। एफेरेसिस मशीन के आ जाने से सिंगल डोनर ब्लड से 60 से 70 हजार प्लेटलेस और करीब 350 एमएल प्लाज्मा तैयार किया जा सकेगा। सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस मशीन के जरिये डोनर एक बार डोनेट करने के बाद दुबारा 72 घंटे बाद फिर प्लेटलेट डोनेट कर सकता है।
इनका कहना है
बीती 30 जुलाई से प्लेटलेट्स मशीन का सेंट्रिफ्यूग रेफ्रिजरेटेड खराब है। सीएस, सीएमएचओ को लिखित शिकायत भेज दी गई। ऑनलाइन कम्प्लेन भी की जा चुकी है। मंगलवार को इंजीनियर आएगा तब मशीन चालू होगी। जिला अस्पताल में एफेरेसिस यूनिट की आवश्यकता है ताकि मरीजों की जरूरतें पूरी हो सके।
डॉ. देवेंद्र सिंह, ब्लड बैंक इंचार्ज , जिला अस्पताल


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