रीवा के संजय गांधी अस्पताल में 20 वर्षों से एक ही ठेकेदार द्वारा संचालित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की असलियत सामने आई है। करोड़ों की मशीनें होते हुए भी मरीजों को बिना शुद्धिकरण के खारा पानी पिलाया जा रहा है। गंदगी से घिरे प्लांट, टंकियों में जमी सफेद परत और प्रशासन की अनदेखी ने मरीजों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है। अब जांच और कार्रवाई की बात हो रही है।

संजय गांधी अस्पताल के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कड़वा सच
रीवा, स्टार समाचार वेब
संजय गांधी अस्पताल में मरीजों को पीने के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन का जिम्मा 20 साल से एक ही ठेकेदार को दिया गया है। आलम यह है कि अस्पताल के छत पर लगी पानी की टंकियों में बगैर फिल्टर के ही पानी भेजा जा रहा है जिसे मरीज पी रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन डब्ल्यूटीपी संचालन व्यवस्था का जिम्मा एक ऐसे व्यक्ति को दिया गया है जो बोरवेल का खारा पानी बगैर शुद्ध किए ही मरीजों को पिला रहा है।
उल्लेखनीय है कि संजय गांधी अस्पताल की ज्यादातर व्यवस्थाएं ठेका पद्धति में हो जाने से जहां ठेकेदार को तगड़ा लाभ मिल रहा है, वहीं एसजीएमएच प्रबंधन भी इस लाभ से अछूता नहीं है। मरीजों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिल सके इसके लिए करोड़ों रुपए की लागत से जल शोधन यंत्र की स्थापना की गई। लिहाजा प्रबंधन की लापरवाही से भर्ती मरीजों को खारा पानी से ही काम चलाना पड़ रहा है। यहां खास बात यह है कि हर वर्ष किए जाने वाले टेंडर में अधिकारियों की साठगांठ से एक ही ठेकेदार के नाम 20 वर्षों से टेंडर रिन्युवल किया जा रहा है जिसे वह मनमानी तरीके से चला रहा है। इसका सीधा नुकसान जहां मरीजों को हो रहा है, वहीं एसएस मेडिकल कॉलेज को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस तरह मिलना चाहिए शुद्ध पानी
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जिसे जलशोधन संयंत्र कहा जाता है। एक ऐसी सुविधा जो पानी को साफ करने और उसे पीने योग्य बनाने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं का उपयोग करती है। यह संयंत्र अशुद्धियों, प्रदूषकों व हानिकारक पदार्थों को हटाता है जिससे यह उपयोग के लिए सुरक्षित माना जाता है। संजय गांधी अस्पताल में लगाए गए जलशोधन संयंत्र में जो प्री-ट्रीटमेंट रासायनिक उपचार, निष्पंदन, कीटाणुरहित करने की प्रक्रिया ही नहीं की जाती है। ऐसी स्थिति में जलशोधन संयंत्र में जो पानी आता है उसे डायरेक्ट संजय गांधी अस्पताल में मरीजों के पीने के लिए भेज दिया जाता है।
जहां से पानी सप्लाई, वहां बिखरी गंदगी
संजय गांधी अस्पताल में पानी पहुंचाने के लिए जो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है वह गंदगी से पूरी तरह पटा हुआ है। अस्पताल के शौचालय से निकलने वाला गंदा पानी संयंत्र के चारों तरफ जमा होता है। ऐसी स्थिति में अस्पताल को दिए जाने वाले खारे पानी की भी शुद्धता पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो फिल्टर प्लांट के अगल-बगल पूरी तरह से नालियां चोक हैं जिनमें बदबूदार पानी भरा हुआ है और वह भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है।
टंकियों के नीचे खारे पानी से जम गई सफेद परत
संजय गांधी अस्पताल के छत में बनी टंकियों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जो पानी आता है वह पूरी तरह से बोरवेल का है। इसका सीधा सबूत यह है कि छत में लगाई गई टंकियों के नीचे जो पानी गिरता है उससे सफेद परतें जम गई हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जलशोधन संयंत्र में पानी को साफ करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती।
शुद्धता के ये हैं पैमाने
जलशोधन संयंत्र का पानी सबसे पहले जालियों से गुजरता है, इसके बाद पानी में क्लोरीन मिलाया जाता है जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करता है। इसके बाद पानी विभिन्न फिल्टरों से गुजरता है तब यह पूरी तरह साफ होता है। एक तरह से पानी को रिवर्स आस्मोसिस प्रक्रिया से ही साफ किया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट संचालक द्वारा जो पानी अस्पताल में पहुंचाया जाता है वह सीधे बोरवेल से उठाकर अस्पताल के छत की टंकियों में भरा जा रहा है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू रहता है, आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है कि उसमें डायरेक्ट सप्लाई का पानी बगैर फिल्टर के अस्पताल को दिया जा रहा है। इसकी मैं जांच करूंगा, इसके बाद ठेकेदार पर कार्रवाई करूंगा।
- रवि सिंह, प्रभारी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट एसजीएमएच रीवा


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