सतना में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से हमले बढ़े। रोजाना 30 नए काटने के मामले, विशेषज्ञों ने नसबंदी केंद्र खोलने की जरूरत बताई।
कोठी तहसील के पैकौरा गांव में आवारा कुत्ते ने 5 वर्षीय बच्ची पर हमला किया, हालत गंभीर।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक पर ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की मौतों पर राज्य सरकारों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट ने डॉग लवर्स की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए।
हमें बताएं कि आप हॉस्पिटल के गलियारों में कितने कुत्ते घूमते हुए देखना चाहते हैं। वकील सीयू सिंह ने कहा- भारी संख्या में आवारा कुत्तों को एक ही शेल्टर में रखने से कई बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर बनाए जाने चाहिए।
आज यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान पीठ ने कहा- ये कहा नहीं जा सकता की कुत्तों के मन में क्या चल रहा है और कब वो किसी को काट लें। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया कर रहे हैं।
जिला अस्पताल परिसर में दो आवारा सांडों की घंटों चली लड़ाई ने मरीजों, परिजनों और स्टाफ में अफरा-तफरी मचा दी। नवजात को गोद में लिए महिलाएं मुश्किल से बचीं, कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जबकि सुरक्षा गार्ड नदारद रहे। पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों और हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि इन पशुओं को तुरंत हटाया जाए। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से भी आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं को हटाकर आश्रय गृह भेजने का आदेश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के केस पर सुनवाई हुई। जहां कोर्ट ने कहा- हम सरकारी कैम्पस में कुत्तों को खाना खिलाने के नियम के लिए निर्देश जारी करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने से भी राहत दे दी।
आवारा कुत्तों के केस में राज्यों की तरफ से हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन नवंबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया है। इस दौरान पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के मुख्य सचिवों को कोर्ट में उपस्थित नहीं होना होगा।
मध्यप्रदेश सरकार ने आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए ‘स्वावलंबी गौशाला योजना’ शुरू की है। इसके तहत प्राइवेट कंपनियों को 125 एकड़ जमीन 30 साल की लीज पर दी जाएगी। 5 हजार आवारा मवेशियों की देखरेख अनिवार्य होगी, साथ ही डेयरी, उत्पाद विक्रय और 5 एकड़ भूमि का व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी मिलेगी।






















