रीवा जिले के सरकारी कॉलेजों में इस बार एडमिशन प्रक्रिया बुरी तरह फ्लॉप रही। 18 कॉलेजों में कुल 27,445 सीटों में से 10,142 सीटें खाली रह गईं। खासकर बैकुंठपुर और संस्कृत कॉलेजों की हालत बेहद खराब है। बैकुंठपुर कॉलेज में 1260 सीटों में से केवल 39 पर ही एडमिशन हुआ। कई नामी कॉलेज भी सीटें नहीं भर पाए, जिससे उच्च शिक्षा की गिरती मांग पर सवाल उठ रहे हैं।
भोज मुक्त विश्वविद्यालय से जुड़े शासकीय जगन्नाथ सिंह स्मृति महाविद्यालय चितरंगी में छात्रों को मिलने वाली निःशुल्क पुस्तकें प्रबंधन की लापरवाही के कारण कूड़े की तरह पड़ी हुई हैं। आरोप है कि प्राचार्य राममिलन प्रजापति और प्रभारी विजय शंकर पांडेय छात्रों से अवैध वसूली करते हैं और शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर चुके हैं। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रबंधन भ्रष्टाचार और उदासीनता पर नकेल कस पाएगा?
मध्यप्रदेश में सरकार की शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की सफलता धरातल पर दिखने लगी है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि निजी-सरकारी कॉलेजों के आंकड़े खुद ही बयां कर रहे हैं। यहां खास बात यह है कि बच्चों की अपेक्षा बच्चियां उच्च शिक्षा के मामले में आगे हैं।
सतना और मैहर जिले के 8 शासकीय महाविद्यालय अभी भी स्कूल भवनों में संचालित हो रहे हैं। वर्षों से भवन निर्माण अधूरा, संसाधनों का अभाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर संकट। क्या सरकार देगी ध्यान?
करोड़ों की सौगात, फिर भी ताले में बंद! सतना गर्ल्स कॉलेज का नवीन छात्रावास डेढ़ साल बाद भी क्यों नहीं हो सका शुरू? 30 छात्राएं कर चुकी हैं आवेदन, पर स्टाफ की कमी बनी बाधा। पढ़ें पूरा मामला।

















