सतना और मैहर जिले के 8 शासकीय महाविद्यालय अभी भी स्कूल भवनों में संचालित हो रहे हैं। वर्षों से भवन निर्माण अधूरा, संसाधनों का अभाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर संकट। क्या सरकार देगी ध्यान?
सतना जिले के पीएम श्री स्कूलों की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। सरकारी नामकरण से भले ही स्कूलों को नया नाम मिला हो, लेकिन हालात वही पुराने हैं- जर्जर भवन, गिरता प्लास्टर, टपकती छतें और लबालब पानी। जानिए कैसे 1547 स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा खतरे में है और प्रशासन अब तक आंखें मूंदे बैठा है।
सीधी जिले में अधिकांश स्कूल वाहन सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी करते हुए चल रहे हैं। ऑटो, मैजिक व अनफिट बसों में छोटे बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। प्रशासनिक निरीक्षण का अभाव और राजनैतिक संरक्षण से कार्रवाई रुकी हुई है।
पन्ना जिले के लूका पुरवा में बच्चे टीनशेड गुमटी में पढ़ाई कर रहे हैं। जर्जर भवन ढहाया गया लेकिन 9 माह बाद भी नया स्कूल भवन नहीं बना।
सतना जिले के मझगवां विकासखंड के गढ़ीघाट गांव में 2013 में स्वीकृत प्राथमिक विद्यालय को अब तक भवन नहीं मिल सका। आदिवासी छात्र महुआ के पेड़ और अब टिन शेड में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। आदिवासी कल्याण के सरकारी दावे एक बार फिर बेनकाब।

















