आरटीआई जवाब में स्पष्ट हुआ कि सार्थक ऐप के नियम नियमित कर्मचारियों तक सीमित हैं। बावजूद इसके एनएचएम संविदाकर्मियों पर ऐप अटेंडेंस का दबाव बना हुआ है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली, मानदेय विवाद और प्रशासनिक सख्ती पर बहस तेज हो गई।
मंडी बोर्ड के सार्थक ऐप में लोकेशन छेड़छाड़ कर फर्जी हाजिरी लगाने का मामला सामने आया है। सतना, मैहर समेत छह जिले दागदार हुए, जबकि रीवा में सबसे ज्यादा कर्मचारी चिन्हित किए गए।
सतना जिले के परसमनिया पीएचसी में चौंकाने वाला मामला सामने आया। रिकॉर्ड में मेडिकल ऑफिसर की सिर्फ 70 दिन उपस्थिति, लेकिन 3 हजार ओपीडी और 4 हजार ब्लड टेस्ट दर्ज। मिशन डायरेक्टर ने जांच के निर्देश दिए।
सतना जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में अब ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। सार्थक ऐप से उपस्थिति दर्ज होने पर ही सितंबर माह की सैलरी जारी होगी। जीपीएस लोकेशन, फेस रिकग्नाइजेशन और ड्यूटी रोस्टर के आधार पर जांच की जाएगी। आदेश का पालन न करने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
सतना जिले में स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू कर दी है। अब चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, आउटसोर्स कर्मचारी और अतिथि शिक्षक सभी की उपस्थिति सार्थक ऐप और हमारे शिक्षक पोर्टल पर दर्ज होगी। जिले को 11 जोन में बांटकर रिपोर्टिंग ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। अक्टूबर से वेतन और मानदेय केवल डिजिटल उपस्थिति के आधार पर ही जारी किए जाएंगे।

















