लोकसभा में महिला सशक्तिकरण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न होने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर दिल्ली में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्रकारवार्ता कर केंद्र सरकार पर हमला बोला। वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया है।
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान संशोधन बिल गिरने के बाद भाजपा और एनडीए ने कांग्रेस और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। अब कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और भाजपा के दावों पर पलटवार किया है।
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई। राहुल गांधी के भाषण ने सदन का माहौल गरमाया।
पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल को 'अपराध का प्रायश्चित' बताया। जानें लोकसभा की 850 सीटों के प्रस्ताव और 2029 के लागू होने की पूरी जानकारी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
मध्य प्रदेश में ओबीसी (OBC) आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील विषय पर एक अहम आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि माता-पिता की केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण नहीं छीना जा सकता। पदों और सामाजिक स्थिति को देखना भी अनिवार्य
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामला एमपी हाईकोर्ट को ट्रांसफर करते हुए अंतिम निर्णय लेने को कहा है।
ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। गुरुवार को भी केस की सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार की ओर से एडिशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज, स्टैंडिंग काउंसिल मृणाल एलकर, हरमीत सिंह रूपराह, अतिरिक्त महाधिवक्ता धीरेंद्र सिंह परमार और शासकीय अधिवक्ता राजन चौरसिया उपस्थित रहे।
मध्य प्रदेश ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का कोई भी वकील मौजूद नहीं रहा। कोर्ट ने इस रवैये पर खेद जताया है। अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी।





















