टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। जानिए टाटा समूह के अगले चेयरमैन की रेस में सबसे आगे चल रहे टी.वी. नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान का पूरा प्रोफाइल।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे प्रतिष्ठित और विशाल 275 अरब डॉलर से अधिक के टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है, और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे इसके बाद पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स ने अगले उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल रेस में तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जो आने वाले समय में देश के इस सबसे बड़े व्यावसायिक साम्राज्य की दिशा तय करेंगे।
सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस ने अपने नए चेयरमैन के रूप में तीन दिग्गजों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिसमें दो अंदरूनी (इंटरनल) और एक बाहरी 'डार्क हॉर्स' उम्मीदवार शामिल हैं:
टी.वी. नरेंद्रन (टाटा स्टील के सीईओ और एमडी): नरेंद्रन समूह के सबसे मजबूत और अनुभवी इंटरनल ऑपरेटिंग उम्मीदवार माने जा रहे हैं। साल 1988 से टाटा स्टील से जुड़े नरेंद्रन के पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने वैश्विक कमोडिटी उतार-चढ़ाव और यूरोप के मुश्किल ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक संभाला है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ उनके करीबी कामकाजी संबंध उन्हें इस रेस में स्वाभाविक दावेदार बनाते हैं।
सौरभ अग्रवाल (टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और ग्रुप सीएफओ): साल 2017 में टाटा संस से जुड़ने वाले सौरभ अग्रवाल वित्तीय कौशल, रणनीति और पूंजी आवंटन के सबसे सटीक विकल्प हैं। वे समूह के निवेश प्रबंधन निर्णयों और पोर्टफोलियो अनुकूलन का मुख्य कार्य संभालते हैं। उनकी निवेश बैंकिंग पृष्ठभूमि और कई बड़ी कंपनियों के बोर्ड की अध्यक्षता का अनुभव उन्हें इस जटिल भूमिका के लिए बेहद प्रासंगिक बनाता है।
आशीष चौहान (एनएसई के एमडी और सीईओ - बाहरी 'डार्क हॉर्स'): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख आशीष चौहान इस रेस के सबसे चौंकाने और दिलचस्प 'डार्क हॉर्स' उम्मीदवार हैं। आईआईटी बॉम्बे और आईआईएम कलकत्ता के पूर्व छात्र चौहान ने बीएसई को एक कॉर्पोरेट संस्थान में बदला और वर्तमान में एनएसई के सबसे बड़े आईपीओ की अगुवाई कर रहे हैं। उनकी तकनीकी, नियामक और वित्तीय बाजारों की गहरी समझ उन्हें एक मजबूत अप्रत्याशित विकल्प बनाती है।
एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल समाप्त होने पर नए नेतृत्व को कई जटिल और दूरगामी व्यावसायिक मोर्चों पर कड़े फैसले लेने होंगे:
एयर इंडिया का कायाकल्प: सरकार से अधिग्रहित एयर इंडिया को वैश्विक स्तर की एयरलाइन बनाने के लिए भारी निवेश, नए विमानों की खरीद और वैश्विक पट्टादाताओं का विश्वास जीतना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
डिजिटल और नए जमाने के व्यवसाय: टाटा डिजिटल के घाटे में चल रहे ऑपरेशन्स को मुनाफे में लाना और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ईवी) के बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना।
टीसीएस का तकनीकी परिवर्तन: समूह की सबसे मूल्यवान कंपनी टीसीएस को तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में बढ़त बनाए रखना।
टाटा संस का आईपीओ और गवर्नेंस: टाटा संस की लंबे समय से लंबित सार्वजनिक लिस्टिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मुद्दों और अल्पसंख्यक शेयरधारकों के दबाव को संभालना।
साल 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के रूप में बागडोर संभाली है। इस उत्तराधिकार प्रक्रिया में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका सबसे अहम होगी। नए चेयरमैन का चयन व्यावसायिक आक्रामकता और टाटा समूह के पारंपरिक मूल्यों तथा परोपकारी लोकाचार के बीच संतुलन स्थापित करने वाला होना चाहिए। चयन समिति आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी ताकि फरवरी 2027 में सुचारू रूप से कार्यभार हस्तांतरण हो सके।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। जानिए टाटा समूह के अगले चेयरमैन की रेस में सबसे आगे चल रहे टी.वी. नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान का पूरा प्रोफाइल।
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