पेट्रोलियम मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए एलपीजी उत्पादन 40% बढ़ाया है। जानें पीएनजी प्रोत्साहन और नए सरकारी दिशा-निर्देश
By: Ajay Tiwari
Mar 18, 20264:33 PM
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए रणनीतिक बदलाव किए हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि घरेलू एलपीजी (LPG) के उत्पादन में 40% की वृद्धि की गई है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि:
किसी भी आउटलेट पर गैस की किल्लत नहीं है।
घरेलू पीएनजी (PNG) और परिवहन सीएनजी (CNG) की 100% आपूर्ति जारी रहेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 22 जहाजों और 600 नाविकों की सुरक्षा की निरंतर निगरानी की जा रही है।
ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सरकार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी के बजाय पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं:
डीम्ड अनुमति: सीजीडी पाइपलाइन के लंबित आवेदनों को तत्काल मंजूरी और नई स्वीकृतियां 24 घंटे में देने के निर्देश दिए गए हैं।
शुल्क माफी: राज्यों को सड़क बहाली और अनुमति शुल्क माफ करने को कहा गया है।
अतिरिक्त आवंटन: पीएनजी के बुनियादी ढांचे में सहयोग करने वाले राज्यों को व्यावसायिक एलपीजी का 10% अतिरिक्त कोटा प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा।
आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव कम करने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का आवंटन शुरू कर दिया है।
सुरक्षा तंत्र: गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) को अनिवार्य कर दिया गया है।
सख्ती: 17 मार्च तक तेल कंपनियों ने देशभर में 2300 से अधिक औचक निरीक्षण किए हैं ताकि बाजार में अनुशासन बना रहे।
किसी भी आपात स्थिति या शिकायत के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित किया है:
कंट्रोल रूम: 30 राज्यों में स्टेट कंट्रोल रूम और 22 राज्यों में जिला कंट्रोल रूम सक्रिय।
हेल्पलाइन: टोल-फ्री नंबर 1800 2333 555 और गैस लीकेज के लिए 1906 पर संपर्क किया जा सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म: व्हाट्सएप, ट्विटर और ओएमसी की वेबसाइट्स के जरिए रियल-टाइम शिकायत दर्ज की जा सकती है।