प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में लागू किए गए नए जीएसटी सुधारों का मप्र के व्यापार, उद्योग और एमएसएमई सेक्टर पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव नजर आने लगा है। इन सुधारों से राज्य के विभिन्न उत्पादों में 6 से 10 प्रतिशत तक कीमतों की कमी दर्ज की गई है।

प्रदेश डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने जारी बयान में कही।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में लागू किए गए नए जीएसटी सुधारों का मप्र के व्यापार, उद्योग और एमएसएमई सेक्टर पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव नजर आने लगा है। इन सुधारों से राज्य के विभिन्न उत्पादों में 6 से 10 प्रतिशत तक कीमतों की कमी दर्ज की गई है। इससे न केवल उद्योगों की लागत घटी है, बल्कि रोजगार, विकास और आजीविका के नए अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। यह बात प्रदेश डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने जारी बयान में कही।
उन्होंने कहा कि राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के सितम्बर माह तक निर्धारित लक्ष्य 8,212 करोड़ के विरुद्ध 8,293.01 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया, जो लक्ष्य से 0.99 प्रतिशत अधिक है। वर्तमान वर्ष में सितंबर 2025 तक प्राप्त राजस्व, गत वर्ष की तुलना में 16.88 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत है कि जीएसटी सुधारों ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। मध्यप्रदेश को घरेलू स्नैक्स, साड़ियां, आदिवासी शिल्प, सीमेंट, बलुआ पत्थर और जूते-चप्पल तक हर क्षेत्र में व्यापक लाभ हुआ है। लागत घटने से कारीगरों को सहयोग, एमएसएमई को मजबूती और घरेलू व वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है। महेश्वर के बुनकरों, मंडला के कलाकारों, सतना के सीमेंट कर्मियों और देवास के जूता निमार्ताओं तक, यह सुधार ग्रामीण और शहरी आजीविका को नई दिशा दे रहा है।
उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि- जीएसटी सुधारों ने व्यापार जगत, उद्योगों और कारीगरों के लिए नई ऊर्जा दी है। कर दरों में की गई कमी से उत्पाद सस्ते हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत और व्यापारियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला है। इन सुधारों से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश अग्रसर हो रहा है।
इंदौर सेंव, लौंग सेंव, मिक्सचर और चिवड़ा जैसे उत्पादों का जीआई टैग प्राप्त केंद्र इंदौर, लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2.5 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। इसका निर्यात मध्य पूर्व, ब्रिटेन और अमेरिका तक होता है। नमकीन पर जीएसटी 12 से घटाकर 5 फीसदी करने से उत्पादों में 6-7 प्रतिशत तक सस्ती होने की प्रवृत्ति देखी गई है। इससे घरेलू बिक्री में वृद्धि और निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।
मध्यप्रदेश, भारत का दूसरा सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य होने के साथ कृषि-मशीनीकरण का प्रमुख केंद्र भी है। इंदौर, भोपाल, देवास, ग्वालियर, उज्जैन और विदिशा में एमएसएमई क्लस्टर द्वारा सीड ड्रिल, थ्रेशर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप बनाए जाते हैं। यहां लगभग 25,000 श्रमिक प्रत्यक्ष और 60,000 लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। ट्रैक्टर, पंप और उपकरणों पर जीएसटी 12/18 से घटाकर 5 फीसदी करने से उपकरणों की लागत में 7-13 प्रतिशत तक की गिरावट आने की उम्मीद है।
खरगोन जिले का महेश्वरी हथकरघा क्षेत्र 2,600 करघों पर लगभग 8,000 बुनकरों को रोजगार देता है, जिनमें महिलाएं मुख्य भूमिका निभाती हैं। विशिष्ट उलटी किनारी (बुगड़ी) वाली माहेश्वरी साड़ियां 2010 से जीआई टैग प्राप्त हैं और यूरोप व अमेरिका तक निर्यात होती हैं। वस्त्र उत्पादों पर जीएसटी 12 से घटाकर 5 फीसदी करने से ये साड़ियां लगभग 6 प्रतिशत सस्ती होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में मांग बढ़ेगी।
मंडला, डिंडोरी, उमरिया और सिवनी में बनने वाली गोंड चित्रकलाएं 2015 से जीआई टैग प्राप्त हैं। ये लोककथाओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित होती हैं। जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से इन कलाकृतियों में लगभग 6 फीसदी कीमत कमी आई है, जिससे कलाकारों को ई-कॉमर्स और निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला है।
बुधनी (सीहोर), उज्जैन और ग्वालियर में तैयार यह पारंपरिक शिल्प 2,000-2,500 कारीगरों को रोजगार देता है। जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से कीमतों में 6 फीसदी तक कमी आई है, जिससे ये पर्यावरण-अनुकूल खिलौने प्लास्टिक के विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। जापान और यूरोप जैसे निर्यात बाजारों में इनकी मांग बढ़ी है।
मंडला, बैतूल, उज्जैन और टीकमगढ़ में 5,000-6,000 ग्रामीण कारीगर, ज्यादातर महिलाएं, टेराकोटा खिलौनों और सजावटी वस्तुओं का निर्माण करती हैं। जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से ये उत्पाद लगभग 6 फीसदी सस्ते हुए हैं, जिससे त्योहारी सीजन में बिक्री में वृद्धि हुई है।
बैतूल और बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में 5,000 कारीगर डोकरा कला में कार्यरत हैं। जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से उत्पादों की कीमत में 6 फीसदी की कमी आई है, जिससे मशीन निर्मित मूर्तियों के मुकाबले यह शिल्प फिर से लोकप्रिय हुआ है।
टीकमगढ़, झाबुआ और अलीराजपुर में 5,000-6,000 कारीगर लाख के बर्तन और बेल धातु की वस्तुएं बनाते हैं। बेल धातु पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत और लाख के बर्तनों पर 12 से घटाकर 5 फीसदी करने से कीमतों में 6-10 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे घरेलू मेलों में बिक्री और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में हजारों जनजातीय परिवार बांस-बेंत के शिल्प में लगे हैं। लगभग 12,000 प्रत्यक्ष और 25,000 अप्रत्यक्ष महिला कारीगरों को काम मिला है। जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से इन उत्पादों में 6 फीसदी की कीमत कमी आई है, जिससे इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिला है।
टीकमगढ़, छतरपुर और बैतूल के पीतल उद्योगों में वंशानुगत कारीगर पारंपरिक बर्तन और दीपक बनाते हैं। जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से कीमतों में 6 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे कारीगरों को स्टील और एल्यूमिनियम से प्रतिस्पर्धा में राहत मिली है।
सतना, कटनी, दमोह और रीवा जैसे केंद्रों के कारण मध्यप्रदेश भारत का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक है। यहां लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार हैं। जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत करने से प्रति 50 किलो बैग में 25-30 की कीमत कमी हुई है। इससे निर्माण और आवास क्षेत्र को बढ़ावा मिला है।
ग्वालियर, शिवपुरी और टीकमगढ़ के केंद्रों में 25,000-30,000 श्रमिक कार्यरत हैं। जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत करने से स्लैब और टाइल्स 8 प्रतिशत सस्ती हुई हैं, जिससे निर्माण और निर्यात को बढ़ावा मिला है।
देवास, इंदौर और ग्वालियर के क्लस्टर में 40,000 प्रत्यक्ष और 1.2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार हैं। 2,500 तक के जूतों पर जीएसटी 18 से घटाकर 5 प्रतिशत करने से 11 प्रतिशत कीमत कमी हुई है, जिससे कारीगरों की आमदनी बढ़ी है और जूता उद्योग को नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है।

मध्यप्रदेश के 2,790 होमगार्ड जवानों के लिए त्योहारों के इस मौसम में बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। 2018 की विशेष भर्ती के दौरान दूसरे जिलों में पदस्थ किए गए जवानों को अब अपने गृह जिले लौटने का अवसर मिलने जा रहा है। सरकार ने जवानों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए होमगार्ड नियम, 2016 के प्रावधानों में एक बार के लिए विशेष छूट देने का निर्णय लिया है।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर शहर में एक आवारा कुत्ते ने दहशत फैला दी है। कुत्ते ने महज 6 घंटे के भीतर 26 लोगों को काटकर घायल कर दिया। दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक यह आवारा कुत्ता मुख्य बाजार में घूम-घूमकर राहगीरों और वाहन चालकों पर हमला करता रहा।
मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के सभी विभागों में वर्षों से लंबित पड़े अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का त्वरित समाधान करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का बड़ा निर्णय लिया है। हाल ही में सरकार द्वारा चलाई गई पदोन्नति प्रक्रिया के फलस्वरूप विभिन्न कार्यालयों में नए पद रिक्त हुए हैं।
धनतेरस पर बाजारों में उमड़ी भीड़ और वाहनों की भारी आवाजाही के कारण राजधानी की हवा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। शनिवार सुबह 5 बजे टीटी नगर मॉनिटरिंग स्टेशन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 197 दर्ज किया गया।
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