मध्यप्रदेश में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) के केस के पीड़ित की आयु तय करने के लिए 10वीं कक्षा की मार्कशीट को ही अहम माना जाएगा। यह नहीं होने पर पहली कक्षा में प्रवेश के समय दर्ज आयु को आधार माना जाएगा।


भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) के केस के पीड़ित की आयु तय करने के लिए 10वीं कक्षा की मार्कशीट को ही अहम माना जाएगा। यह नहीं होने पर पहली कक्षा में प्रवेश के समय दर्ज आयु को आधार माना जाएगा। स्कूल में नाम नहीं होने की स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्र के रजिस्टर में अंकित जन्म तिथि को मान्य किया किया जाएगा। एडीजी महिला सुरक्षा अनिल कुमार ने इस संबंध में सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि 10वीं की मार्कशीट को प्रमाण माना जाए।
मोनालिसा का उम्र विवाद
दरअसल, प्रयागराज कुंभ से चर्चा में आई खरगोन की मोनालिसा की आयु पर विवाद है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने खरगोन जिले के पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में जवाब मांगा है। इसी बीच पुलिस मुख्यालय ने भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
पीड़ितों को मिलेगा न्याय
दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि आंगनबाड़ी में भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में माता-पिता द्वारा दी गई जानकारी को मान्य किया जाए। इन नियमों का उद्देश्य पाक्सो एक्ट के तहत आयु निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाना है ताकि पीड़ितों को सही न्याय मिल सके।
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