भोपाल में सफाई कर्मचारियों की 3 दिन से जारी हड़ताल से सड़कों पर 2550 टन कचरा जमा हो गया है। वीआईपी इलाकों से लेकर बाजारों तक गंदगी का आलम है। जानिए कर्मचारियों की माँगें और शहर के मौजूदा हालात।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। तीन दिनों से जारी इस हड़ताल के चलते शहर की सड़कों और आवासीय इलाकों में 2550 टन कचरे का अंबार लग गया है। स्थिति यह है कि धनतेरस के मौके पर खरीदारी के लिए निकले लोगों को दुर्गंध और कचरे के ढेर के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सफाईकर्मियों के समर्थन में नगर निगम के करीब 6 हजार अन्य कर्मचारी भी आ गए हैं, जिससे शुक्रवार को पानी की सप्लाई और टैंकर सेवा भी प्रभावित हुई है।
हड़ताल का व्यापक असर केवल आम बाजारों या रिहाइशी कॉलोनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के अति-संवेदनशील और वीआईपी इलाकों में भी गंदगी का अंबार लग चुका है।
मंत्रालय और वल्लभ भवन: राज्य प्रशासनिक केंद्र के आसपास डस्टबिन ओवरफ्लो होकर सड़कों पर फैल रहे हैं।
चार इमली: मंत्रियों, वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के बंगलों वाले इस इलाके में साईं मंदिर और हनुमान मंदिर के पास कचरे का ढेर जमा है।
अटल पथ: दो दिन पूर्व आयोजित भाजपा की रैली के बाद फैला कचरा अब तक साफ नहीं किया जा सका है।
कोलार रोड और बुधवारा: कोलार रोड के सिक्सलेन सेंटर वर्ज पर बीते तीन दिनों से कचरा पड़ा है। वहीं बुधवारा बाजार में सफाई न होने के कारण सड़कों पर मरे हुए जानवरों के शव पड़े दिखाई दे रहे हैं।
भोपाल शहर से औसतन हर दिन 850 टन कचरा निकलता है, जिसे 400 से अधिक डोर-टू-डोर कचरा गाड़ियों के माध्यम से 17 गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुँचाया जाता है। वहाँ से कैप्सूल टैंकरों के जरिए कचरे को आदमपुर छावनी भेजा जाता है।
हड़ताल के कारण सभी 400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी हैं। नगर निगम की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था न हो पाने के कारण कई स्थानों पर लोग स्वयं ही कचरे में आग लगा रहे हैं, जिससे शहर में धुएं और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।
सफाईकर्मियों के समर्थन में जल प्रदाय विभाग के कर्मचारी भी आ गए हैं। गुरुवार को दी गई चेतावनी के बाद शुक्रवार को कई इलाकों में नलों के वॉल्व नहीं खोले गए और टैंकरों से पानी का परिवहन भी रोक दिया गया। भोपाल के 2.30 लाख नल कनेक्शनों में से कई इलाकों की गरीब बस्तियों में जल संकट गहरा गया है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में समय पर वॉल्व खोले जाने से थोड़ी राहत बनी हुई है।
सफाई संघ की 4 प्रमुख मांगें
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान और प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार, नगर निगम में लगभग 7 हजार कर्मचारी 25 दिवसीय वेतनमान पर काम कर रहे हैं। उन्हें प्रतिमाह मात्र ₹10,500 मिलते हैं, जिसमें वर्तमान महंगाई के दौर में गुजारा करना संभव नहीं है।
कर्मचारियों की 4 प्रमुख मांगें:
वेतन वृद्धि: मासिक वेतन ₹10,500 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए।
नियमितीकरण: वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी (नियमित) किया जाए।
ठेका प्रथा का अंत: ठेकेदारी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
अनुकंपा नियुक्ति: पात्र परिवारों को शीघ्र अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
यूनियन के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटर, जलप्रदाय, फायर, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और भवन निर्माण शाखा के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं और अब यह लड़ाई आर-पार के स्तर पर लड़ी जाएगी।
कर्मचारी नेता अशोक वर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय 'अटल भवन' की बिजली सप्लाई बंद कर ताला लगा दिया। इसके परिणामस्वरूप निगम मुख्यालय के साथ-साथ शहर के सभी 85 वार्डों और 21 जोनल कार्यालयों का प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप हो चुका है।
शहर में गहराते संकट और कचरे के लगातार बढ़ रहे ढेर को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर ने ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। माना जा रहा है कि उच्च स्तरीय बैठक में कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनने के बाद ही हड़ताल समाप्त हो सकेगी।
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