मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित जमानत अर्जियों के शीघ्र निराकरण के लिए चीफ जस्टिस के निर्देश पर 7 विशेष एकल पीठों का गठन किया गया है। 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे सुनवाई हो रही है। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भारी संख्या में लंबित मामलों के दबाव को कम करने और मामलों के त्वरित निराकरण के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के विशेष निर्देशों के तहत राज्य में लंबित जमानत याचिकाओं के जल्द निपटारे के लिए 7 विशेष पीठों (Special Benches) का गठन किया गया है। इन विशेष पीठों के माध्यम से 29 अक्टूबर से सुनवाई का दौर शुरू हो चुका है, जो आगामी 6 नवंबर तक जारी रहेगा। इस विशेष व्यवस्था के तहत सभी संबंधित बेंचों पर रोजाना दोपहर 2:30 बजे से जमानत अर्जियों की सुनवाई की जा रही है, जिससे वकीलों और पक्षकारों को अपनी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई का अवसर मिल रहा है।
दीपावली के अवकाश और त्योहारी सीजन के दौरान भी न्याय प्रक्रिया को गति देने के लिए हाईकोर्ट प्रशासन ने 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक का विशेष शेड्यूल निर्धारित किया है। इस तयशुदा अवधि के दौरान जिन वकीलों और पक्षकारों की जमानत याचिकाएं सूचीबद्ध की गई हैं, उन्हें नए और संशोधित शेड्यूल के अनुसार अपनी बात रखने का मौका मिल रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों और विचाराधीन मामलों से जुड़े व्यक्तियों को राहत पहुंचाना है, ताकि लंबे समय से पेंडिंग मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके।
लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के इस अभियान के तहत हाईकोर्ट प्रशासन ने छह प्रमुख न्यायाधीशों को विशेष एकल पीठों की जिम्मेदारी सौंपी है। इन न्यायाधीशों में जस्टिस विवेक रूसिया, जस्टिस आनंद पाठक, जस्टिस विशाल मिश्रा, जस्टिस दीपक खोट, जस्टिस रामकुमार चौबे और जस्टिस बीपी शर्मा शामिल हैं। ये सभी न्यायाधीश निर्धारित विशेष सत्रों में रोजाना दोपहर के बाद लगातार जमानत याचिकाओं की सुनवाई कर रहे हैं, जिससे मुकदमों के बैकलॉग को काफी हद तक कम करने में मदद मिल रही है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर के साथ-साथ इंदौर और ग्वालियर बेंच में कुल मिलाकर 3 लाख से अधिक विभिन्न प्रकार की याचिकाएं लंबित हैं। अदालतों में मुकदमों के इस भारी दबाव और लगातार बढ़ते बोझ को देखते ही चीफ जस्टिस ने इस वैकल्पिक और त्वरित व्यवस्था को लागू किया है। दीपावली की छुट्टियों के बीच भी जमानत मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर हो रही है, ताकि न्याय मिलने में देरी न हो।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं, जिनके मुकाबले वर्तमान में केवल 38 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। सीमित न्यायधीशों की संख्या के बावजूद न्याय व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा, आगामी 6 नवंबर को जस्टिस पीके अग्रवाल सेवानिवृत्त होने वाले हैं। न्यायाधीशों की कमी और भारी पेंडेंसी से निपटने के लिए हाल ही में ग्वालियर बेंच में भी चीफ जस्टिस की एकल पीठ ने खुद बैठकर कई महत्वपूर्ण मामलों का त्वरित निपटारा किया था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित जमानत अर्जियों के शीघ्र निराकरण के लिए चीफ जस्टिस के निर्देश पर 7 विशेष एकल पीठों का गठन किया गया है। 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे सुनवाई हो रही है। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
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भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र में करवा चौथ के दिन सनसनीखेज मामला सामने आया है। व्रत खोलने के बाद आपसी नाराजगी के चलते 22 वर्षीय पत्नी ने फांसी लगाई, तो वहीं सदमे में पति ने भी पेड़ से लटककर जान दे दी।
रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की एनएबीएच मान्यता के नवीनीकरण के लिए तीन सदस्यीय टीम 30 अक्टूबर से निरीक्षण करेगी। पिछली जांच में 60 आपत्तियां मिली थीं। डॉक्टरों, स्टाफ और मरीज सुविधाओं की व्यवस्था पर रहेगी नजर।
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रीवा के नौवस्ता क्षेत्र में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। लेटराइट से लदे सात हाइवा जब्त किए, वहीं नरौरा में दबिश देकर ट्रैक्टर, मशीनरी और विस्फोटक बरामद किए।
जिला चिकित्सालय पन्ना की ई-हॉस्पिटल निविदा में 200 बिस्तरीय अस्पताल का पांच साल का अनुभव अनिवार्य करने पर विवाद गहराया। आरोप है कि शर्त से मौजूदा फर्म को लाभ और नई एजेंसियों को नुकसान होगा।
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