मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 3600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर 14 हजार से स्टाइपेंड 30 हजार करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जानें क्या है पूरा मामला और स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर।

स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर 3600 इंटर्न ने बनाई काम से दूरी
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे लगभग 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर अपने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं। इस आंदोलन के कारण प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है।
एमबीबीएस इंटर्न्स की सबसे प्रमुख मांग वर्तमान में मिलने वाले 14,337 रुपये के मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह किए जाने की है। इंटर्न्स का तर्क है कि वे अस्पतालों में दिन-रात 24-24 घंटे की कठिन और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी करते हैं, लेकिन आज की मंहगाई और उनकी कड़ी मेहनत के मुकाबले यह राशि बेहद कम है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं, बल्कि उनके श्रम के सम्मान और उचित पारिश्रमिक की है।
मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न्स का यह स्टाइपेंड बढ़ाने का आंदोलन 9 जुलाई 2026 से लगातार जारी था, जो अब कामबंद और अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल चुका है। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) सहित प्रदेश के सभी 13 शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स ने बीते शनिवार से काम पूरी तरह बंद कर दिया है।
'वॉइस ऑफ इंटर्न्स, मध्य प्रदेश' के प्रतिनिधिमंडल ने चिकित्सा शिक्षा आयुक्त से मुलाकात की थी, जिसके बाद अधिकारियों ने स्टाइपेंड में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि का मौखिक आश्वासन दिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय मांगा। हालांकि, प्रतिनिधि डॉ. रितिक गुप्ता और डॉ. ऋतिक शर्मा का साफ कहना है कि जब तक शासन की ओर से लिखित और समयबद्ध आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक यह हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
हड़ताल के कारण अस्पतालों की नियमित ओपीडी (OPD) और वार्ड सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। हालांकि, मरीजों की परेशानी को देखते हुए आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं फिलहाल जारी रखी गई हैं। इंटर्न्स के इस आंदोलन को जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) और प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (सीनियर डॉक्टरों का संगठन) का बड़ा समर्थन मिला है। जूडा ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो वे भी ओपीडी सेवाओं के पूर्ण बहिष्कार के रूप में हड़ताल में कूद सकते हैं।

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