राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई। गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग मिस्टेक के आधार पर मिली जमानत पर कोर्ट ने उठाए सवाल। जानें पूरा मामला और लेटेस्ट अपडेट।

इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने नया कानूनी मोड़ ला दिया है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत दी जा सकती है।
इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई हुई। यह मामला तब चर्चा में आया जब मेघालय हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी। हाईकोर्ट का तर्क था कि गिरफ्तारी मेमो में पुलिस ने हत्या की धारा (BNS 103(1)) की जगह गलती से धारा 403 लिख दी थी। इसे अदालत ने 'न्यायिक सोच के अभाव' और प्रक्रियात्मक चूक माना था।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस कानूनी सवाल को एक बड़ी बेंच के पास भेज सकता है कि क्या केवल एक 'टाइपिंग गलती' (Typo) के आधार पर किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है और आरोपी को जमानत दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को निर्देश दिया है कि वे गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां पेश करें। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जमानत का यह तकनीकी आधार टिकाऊ नहीं पाया गया, तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द भी की जा सकती है।
सरकार का तर्क: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित हत्या का मामला है। उन्होंने तर्क दिया कि गिरफ्तारी मेमो में गलत धारा का उल्लेख मात्र एक 'लिपिकीय त्रुटि' (Clerical Error) है। इसे आधार बनाकर जमानत देना कानून की गलत व्याख्या है, क्योंकि आरोपी को गिरफ्तारी के समय आधार उपलब्ध करा दिए गए थे।
आरोपी का पक्ष: दूसरी ओर, सोनम रघुवंशी ने मीडिया के सामने आकर अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा है। उसने दावा किया है कि वह नेपाल नहीं भागी है, बल्कि शिलॉन्ग में ही है और जांच में पूरी तरह सहयोग कर रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में गिरफ्तारी की प्रक्रियाओं और तकनीकी आधारों पर जमानत के मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि प्रक्रियात्मक चूक बनाम गंभीर अपराध में प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए।
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